बजट 2026: भारत अब 'डीप टेक' और 'मेक इन इंडिया' पर बड़ा दांव, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बूस्ट!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
बजट 2026: भारत अब 'डीप टेक' और 'मेक इन इंडिया' पर बड़ा दांव, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बूस्ट!
Overview

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2026 के लिए पेश किए गए बजट में भारत की आर्थिक दिशा को नई ऊंचाई देने का वादा किया है। इस बार का बजट 'डीप टेक', स्वदेशी बौद्धिक संपदा (Indigenous IP) और मजबूत सप्लाई चेन बनाने पर केंद्रित है। सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में ज़बरदस्त बढ़ोतरी की है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम क्षेत्रों में।

बड़े पूंजी निवेश का ऐलान!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का बड़ा सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Public Capital Expenditure) लक्ष्य रखा है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 9% ज़्यादा है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.4% है, जो पिछले एक दशक से भी अधिक समय में सबसे ज़्यादा है। यह बड़ा निवेश सीधे तौर पर कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर्स को सहारा देगा और इकोनॉमिक एक्टिविटी को बढ़ाने में मदद करेगा।

मैन्युफैक्चरिंग में 'असेंबली' से 'इकोसिस्टम' तक का सफर

बजट में मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी में बड़ा बदलाव लाया गया है। अब फोकस सिर्फ फाइनल प्रोडक्ट की असेंबली से हटकर, एक एंड-टू-एंड मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने पर होगा। इसके तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) को ₹40,000 करोड़ का बूस्ट दिया गया है। इसका मकसद भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन में और गहराई तक शामिल करना और जरूरी कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसी तरह, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का दायरा बढ़ाकर इसमें इक्विपमेंट, मैटेरियल और स्वदेशी IP डेवलपमेंट को भी शामिल किया गया है। यह भारत को टेक्नोलॉजिकल रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

MSME को सहारा और फिस्कल कंसॉलिडेशन

छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सपोर्ट करने के लिए बजट में ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड और सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड के लिए ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप पेश किया गया है। ये कदम MSME सेक्टर को कैपिटल एक्सेस में सुधार करेंगे। इन पहलों के साथ-साथ, सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) के प्रति भी प्रतिबद्ध है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) का लक्ष्य GDP का 4.3% रखा गया है, और सरकार कर्ज-से-GDP अनुपात को 55.6% तक लाने का लक्ष्य रखती है, जबकि FY31 तक इसे 50% पर लाने की मंशा है।

डेटा सेंटर्स को बड़ा टैक्स हॉलिडे

भारत अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक अहम हब बनने की तैयारी कर रहा है। बजट में डेटा सेंटर्स और क्लाउड सर्विसेज को AI और अगली पीढ़ी की सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। विदेशी कंपनियों के लिए, जो भारतीय डेटा सेंटर्स के जरिए ग्लोबल क्लाउड सर्विसेज प्रदान करती हैं, 2047 तक 21 साल का टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) प्रस्तावित किया गया है। यह 'डेटा-इन-इंडिया' पॉलिसी को बढ़ावा देगा और बड़े इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करेगा। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे डेटा सेंटर कैपेसिटी में जबरदस्त ग्रोथ दिखेगी।

बाजार की प्रतिक्रिया और भविष्य की राह

बजट पेश होने के दिन शेयर बाज़ारों में शुरुआती गिरावट देखी गई थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,800 अंकों से ज़्यादा गिर गया था। हालांकि, कुछ दिनों के भीतर ही बाज़ारों ने वापसी की और रिकॉर्ड हाई के करीब ट्रेड करने लगे। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के रोडमैप को समझ रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह बजट पिछले सालों के मुकाबले एक बड़ा रणनीतिक बदलाव दिखाता है, जिसमें औद्योगिक रणनीति और एग्जीक्यूशन पर जोर है। इस योजना की सफलता इंप्लीमेंटेशन, प्राइवेट सेक्टर के निवेश और एक कॉम्पिटिटिव इकोसिस्टम के निर्माण पर निर्भर करेगी।

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