विकास का रोडमैप: इंफ्रा और MSME पर फोकस
यह बजट भारत की इकोनॉमी को सप्लाई-साइड पर मजबूत करने और प्रोडक्टिविटी-लेड ग्रोथ की ओर एक बड़ा कदम है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुमानों के मुताबिक, भारत की GDP ग्रोथ FY26 में 7.4% रहने की उम्मीद है, जो मजबूत डोमेस्टिक डिमांड और प्राइवेट सेक्टर के बढ़ते इन्वेस्टमेंट का नतीजा है। इसी रफ्तार को बनाए रखने और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को पाने के लिए, सरकार ने FY27 के लिए पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को पिछले साल के मुकाबले बढ़ाकर रिकॉर्ड ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया है। यह भारत के इतिहास में सरकारी खर्च का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस भारी-भरकम निवेश का मकसद देश भर में लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाना, कामकाज की लागत कम करना और खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में इकोनॉमिक गतिविधियों को नई जान देना है। इसके अलावा, देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की भी योजना है।
MSME को मिलेगी नई उड़ान
बजट में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन्हें और मजबूत बनाने और मुश्किल समय से उबरने में मदद करने के लिए ₹10,000 करोड़ का एक खास 'MSME ग्रोथ एंड रेजिलिएंस फंड' शुरू किया जाएगा। साथ ही, इन छोटे और मझोले उद्योगों के लिए लोन (क्रेडिट) मिलना आसान बनाने और नियमों (कंप्लायंस) को सरल करने के कई कदम उठाए गए हैं, ताकि ये 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में और बड़ी भूमिका निभा सकें।
सेक्टर-स्पेसिफिक पहलें और फिस्कल हेल्थ
इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, बजट में टूरिज्म सेक्टर को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसके तहत प्रोफेशनल स्किलिंग, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना, और बुद्धिस्ट सर्किट व मेडिकल टूरिज्म हब के विकास पर जोर दिया जाएगा। एजुकेशन सेक्टर को भी नए इंस्टीट्यूट और लैब्स के ज़रिए सपोर्ट मिलेगा। बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने के बावजूद, सरकार फिस्कल डिसिप्लिन (राजकोषीय अनुशासन) पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) को GDP के 4.3% पर लाने का लक्ष्य है, जो FY26 में 4.4% अनुमानित है। वहीं, सरकार का अनुमान है कि 2026-27 के बजट अनुमानों (BE) के लिए डेट-टू-जीडीपी रेश्यो (कर्ज-से-जीडीपी अनुपात) लगभग 55.6% रहेगा।
इकोनॉमी पर बंटे नज़रिया
Union Budget 2026-27 पर इकोनॉमी एक्सपर्ट्स और पॉलिटिकल पार्टीज़ के बीच विचारों का गहरा अंतर देखने को मिल रहा है। रूलिंग NDA के नेताओं, जैसे गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, ने इस बजट को भारत को 'भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था' बनाने की दिशा में एक 'प्रगतिशील' और 'दूरदर्शी' कदम बताया है। उनके सहयोगियों ने भी इसकी सराहना की है। दूसरी ओर, विपक्ष ने इसे 'भारत की असली मुश्किलों से बेखबर' करार दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जैसे नेताओं का कहना है कि बजट युवाओं की बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज करता है। आलोचकों का कहना है कि इसमें इन चुनौतियों के ठोस समाधान का अभाव है।
आगे की राह
Union Budget 2026-27 का मुख्य मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर और MSMEs में बड़े पब्लिक इन्वेस्टमेंट के ज़रिए भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को मज़बूत करना और 'विकसित भारत' के विज़न को हासिल करना है। सरकार प्रोडक्टिविटी-लेड ग्रोथ मॉडल और स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स पर ज़ोर दे रही है। हालांकि, यह बजट किस हद तक सीधे तौर पर बेरोजगारी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का समाधान कर पाता है, यह देखने वाली बात होगी, क्योंकि इसी को लेकर राजनीतिक बहसें तेज होने की उम्मीद है।