India Budget 2026: सरकारी खर्चों में उछाल, पर विकास पर दांव | Budget 2026-27

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Budget 2026: सरकारी खर्चों में उछाल, पर विकास पर दांव | Budget 2026-27
Overview

भारत सरकार ने अपने यूनियन बजट 2026-27 में सरकारी प्रशासनिक खर्चों (Administrative Expenses) के लिए **₹1,102 करोड़** का आवंटन किया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY) की तुलना में **12.6%** की बढ़त दर्शाता है। हालांकि, यह बड़ी बढ़त, सरकार के बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) और फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) के बड़े लक्ष्यों के बीच आई है।

सरकार का खर्च का गणित: क्या बदला?

यूनियन बजट 2026-27 के लिए सरकार ने अपने प्रशासनिक कामकाज से जुड़े खर्चों में इजाफा किया है। इस बार कुल ₹1,102 करोड़ का बजट रखा गया है, जो कि पिछले साल के ₹978.20 करोड़ से 12.6% ज़्यादा है। इस बढ़त में मंत्रियों के काउंसिल (Council of Ministers), प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (PMO) और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट (Cabinet Secretariat) जैसे महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के खर्च शामिल हैं। ये खर्च मंत्रियों के वेतन-भत्ते, यात्रा और अन्य प्रशासनिक ज़रूरतों के लिए होंगे।

विकास पर बड़ा दांव: कैपेक्स में भारी निवेश

हालांकि, सरकारी खर्चों में यह बढ़त, बड़े विजन का एक छोटा हिस्सा है। इस बजट का मुख्य फोकस देश के इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और आर्थिक विकास पर है। सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया है, जो पिछले साल के ₹11.2 लाख करोड़ से काफी ज़्यादा है। 'विकसित भारत' (Viksit Bharat) की थीम पर आधारित यह बजट, मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) को बढ़ावा देने और रोज़गार पैदा करने पर जोर दे रहा है।

फिस्कल टारगेट और वित्तीय सेहत

सरकार ने अपने वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) को GDP के 4.3% पर लाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 4.4% से कम है। इसी तरह, डेट-टू-जीडीपी रेशियो (Debt-to-GDP ratio) को घटाकर 55.6% करने की योजना है। इस तरह, सरकार एक तरफ ज़रूरी प्रशासनिक कामों के लिए फंड बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ (Long-term growth) और वित्तीय स्थिरता (Financial stability) के लिए बड़े निवेश पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इन जगहों पर हुआ खर्च में बदलाव

मंत्रियों के काउंसिल (Council of Ministers) का बजट बढ़कर ₹620 करोड़ कर दिया गया है, जबकि पिछले साल यह ₹483.54 करोड़ था। PMO के लिए बजट ₹68 करोड़ से बढ़कर ₹73.52 करोड़ हो गया है, और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट का बजट ₹78 करोड़ से बढ़कर ₹80 करोड़ कर दिया गया है। वहीं, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट (National Security Council Secretariat) का बजट ₹279.74 करोड़ से घटाकर ₹256.19 करोड़ किया गया है। प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर (Principal Scientific Adviser) के ऑफिस को ₹65 करोड़ मिले हैं।

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