भारत में जनसांख्यिकी का बढ़ता विभाजन
जनसंख्या वृद्धि की राष्ट्रीय गति धीमी होने के बीच, भारत के राज्यों के बीच एक अलग सच्चाई उभर रही है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Sample Registration System) के आंकड़े बताते हैं कि जो राज्य तेजी से अपनी जनसांख्यिकी बदल रहे हैं और जहां जन्म दरें बढ़ रही हैं, उनके बीच एक बढ़ती खाई है। यह बदलाव इन क्षेत्रों के कार्यबल (Workforce) और उपभोक्ता बाजारों (Consumer Markets) में दीर्घकालिक परिवर्तन ला सकता है।
क्षेत्रीय जन्म दर में उछाल
त्रिपुरा एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आया है, जहां क्रूड बर्थ रेट (Crude Birth Rate) में काफी वृद्धि हुई है। यह स्थानीय कारकों की ओर इशारा करता है जो राष्ट्रीय स्तर पर कम फर्टिलिटी की प्रवृत्ति के विपरीत काम कर रहे हैं। जहां केरल (Kerala) और तमिलनाडु (Tamil Nadu) जैसे राज्य बुजुर्ग आबादी से जूझ रहे हैं, वहीं त्रिपुरा की जन्म दर 12.8 से बढ़कर 15 प्रति 1,000 लोग हो गई है, जो जनसंख्या वृद्धि का संकेत देती है। बिहार (Bihar) जनसांख्यिकी में अग्रणी बना हुआ है, जिसकी जन्म दर बढ़कर 26.8 प्रति 1,000 हो गई है। उच्च आबादी वाले राज्य में यह निरंतर वृद्धि बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और शिक्षा (Education) की मांग को बढ़ाती है, जो घटती जन्म दर वाले राज्यों की तुलना में अलग चुनौतियां पेश करती है।
औद्योगिक क्षेत्रों में घटती फर्टिलिटी
इसके विपरीत, तमिलनाडु (Tamil Nadu) और केरल (Kerala) जैसे दक्षिणी राज्य रिप्लेसमेंट-लेवल फर्टिलिटी (Replacement-level fertility) के करीब पहुंच रहे हैं, और जन्म दर में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। यह नरमी अक्सर शहरीकरण (Urbanization) में वृद्धि और कार्यबल में अधिक महिलाओं की भागीदारी से जुड़ी होती है। हालांकि, यह सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों (Social security systems) के लिए जोखिम और संभावित श्रम की कमी (Labor shortages) भी पैदा करती है। पारंपरिक रूप से उच्च फर्टिलिटी वाले राज्य उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी क्रूड बर्थ रेट 25.4 से घटकर 23.5 हो गया है, जो राष्ट्रीय पैटर्न की ओर एक बदलाव का संकेत देता है, हालांकि यह दक्षिणी समकक्षों की तुलना में अलग गति से हो रहा है।
विभाजन का आर्थिक प्रभाव
यह क्षेत्रीय भिन्नता एक दो-गति वाली अर्थव्यवस्था (Two-speed economy) बनाती है। बिहार (Bihar) जैसे उच्च जन्म दर वाले राज्यों को अपनी युवा आबादी का लाभ उठाने के लिए बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा करने की आवश्यकता है। घटती जन्म दर वाले राज्यों को सिकुड़ते कार्यबल की भरपाई के लिए प्रौद्योगिकी (Technology) और निवेश (Investment) के माध्यम से उत्पादकता (Productivity) बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। कुछ क्षेत्रों में उच्च जन्म दर सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public health) और शिक्षा प्रणालियों (Education systems) पर दबाव डाल सकती है, जिससे उन राज्यों के साथ विकास का अंतर (Development gap) और बढ़ सकता है जिन्होंने अपनी जनसंख्या को स्थिर कर लिया है। विशेषज्ञ इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या यह विचलन (Divergence) एक अस्थायी पोस्ट-पैंडेमिक प्रभाव है या क्षेत्रीय जनसांख्यिकी और प्रवासन (Migration) में एक स्थायी बदलाव है।
