अप्रैल में क्यों बढ़ा Trade Deficit?
अप्रैल के महीने में भारत का ट्रेड डेफिसिट उम्मीद से ज्यादा बढ़कर $28.38 बिलियन हो गया, जबकि मार्च में यह $20.67 बिलियन था। मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान $26.5 बिलियन के आसपास था, लेकिन असल आँकड़ा इससे ऊपर रहा। इसका सबसे बड़ा कारण इम्पोर्ट्स का 10% सालाना दर से बढ़कर $71.94 बिलियन तक पहुंचना है। हालाँकि, एक्सपोर्ट्स में भी 13% से ज्यादा की अच्छी ग्रोथ दिखी, जो पिछले एक दशक में सबसे अच्छी मासिक ग्रोथ में से एक है, लेकिन यह इम्पोर्ट्स की रफ्तार को थामने के लिए काफी नहीं था।
एक्सपोर्ट्स की रफ्तार, फिर भी चिंताओं के बादल
अप्रैल में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स (Merchandise Exports) में 13% से ज्यादा की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की बात करें तो कुल एक्सपोर्ट्स (मर्चेंडाइज और सर्विसेज) $860.09 बिलियन के पार पहुंचे, जो पिछले साल से 4.22% ज्यादा है। वहीं, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स $441.78 बिलियन और सर्विसेज एक्सपोर्ट्स $418.31 बिलियन पर रहे। पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और मिनरल्स जैसे सेक्टरों ने एक्सपोर्ट्स में अच्छा योगदान दिया।
एनर्जी की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव बने इम्पोर्ट्स के पीछे
इम्पोर्ट्स में हुई इस भारी बढ़ोतरी के पीछे ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों, खासकर कच्चे तेल (Crude Oil) का महंगा होना है। वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है, इसलिए एनर्जी का बिल बढ़ना तय था। अप्रैल में मिडिल ईस्ट से होने वाले इम्पोर्ट्स में 31.64% की भारी गिरावट आई, जिसका एक कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की दिक्कतें भी हैं।
इसका सीधा असर थोक महंगाई (Wholesale Price Inflation) पर भी दिखा, जो अप्रैल 2026 में बढ़कर 8.3% पर पहुँच गई। अकेले कच्चे तेल की महंगाई 88.06% तक जा पहुंची, जो तीन और आधे सालों का सबसे बड़ा आँकड़ा है। इस बढ़ते ट्रेड डेफिसिट और इम्पोर्ट बिल ने भारतीय रुपये (Rupee) पर दबाव डाला है और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं बढ़ाई हैं।
स्ट्रक्चरल चुनौतियाँ और आगे का जोखिम
सर्विस एक्सपोर्ट्स का मजबूत होना थोड़ी राहत जरूर देता है, लेकिन बढ़ता ट्रेड डेफिसिट भारत के लिए एक स्ट्रक्चरल चुनौती बना हुआ है। FY26 में सोने (Gold) के इम्पोर्ट्स में बढ़त भी डेफिसिट को बढ़ाने वाली रही। जबकि FY26 में पेट्रोलियम इम्पोर्ट्स कम थे, वेस्ट एशिया के मौजूदा हालात और बढ़ती ग्लोबल कीमतें इस ट्रेंड को पलट सकती हैं और डेफिसिट को और बढ़ा सकती हैं।
चीन (China) से इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, मशीनरी और केमिकल्स जैसे सामानों के लगातार इम्पोर्ट्स से भारत की निर्भरता साफ दिखती है। वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने शिपिंग लागत (Freight Costs) और सामानों की देरी को भी बढ़ाया है, जिसका असर खासकर MSMEs (Micro, Small, and Medium Enterprises) पर पड़ा है, जो भारत के कुल एक्सपोर्ट्स का 48% हिस्सा हैं। RBI ने 2026-27 में करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) के बढ़ने के खतरे की चेतावनी दी है।
आर्थिक आउटलुक और सरकारी लक्ष्य
जानकार मानते हैं कि भारत की आर्थिक रफ्तार बनी रहेगी, हालांकि खाने-पीने और ईंधन की कीमतों के दबाव से महंगाई थोड़ी और बढ़ सकती है। RBI ने FY27 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6% लगाया है, लेकिन इसमें बढ़ोतरी के संकेत हैं। सरकार ने FY31 तक कुल एक्सपोर्ट्स को दोगुना करके $2 ट्रिलियन तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने और व्यापार संतुलन बनाए रखने के लिए ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स, भू-राजनीतिक अस्थिरता और एक्सपोर्ट्स को कॉम्पिटिटिव बनाए रखने जैसी चुनौतियों से निपटना अहम होगा।