टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य क्यों चूके?
FY26 के लिए डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए, जिससे सरकार पर राजस्व बढ़ाने का दबाव आ गया है। इस फाइनेंशियल ईयर में कलेक्शन सिर्फ 5.1% बढ़कर ₹23.4 लाख करोड़ रहा, जो संशोधित लक्ष्य से लगभग ₹81,000 करोड़ कम था। इस कमी को पूरा करने के लिए, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) अब ₹26.97 लाख करोड़ के FY27 लक्ष्य को हासिल करने के लिए आक्रामक तरीका अपना रही है।
वसूली के नए तरीके और लक्ष्य
खास तौर पर, विभाग FY27 तक कन्फर्म टैक्स डिमांड के तौर पर ₹2.57 लाख करोड़ की वसूली पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके लिए, टॉप 10,000 बड़े टैक्स डिफॉल्टरों के मामलों को टारगेट किया जा रहा है। इस वसूली को तेज करने के लिए, CBDT आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल फोरेंसिक जैसे एडवांस्ड टूल्स का इस्तेमाल कर रही है। इसके अलावा, टैक्स डिफॉल्टर्स की प्रॉपर्टीज का पता लगाने के लिए CERSAI डेटाबेस का भी सहारा लिया जा रहा है।
एक्सपर्ट्स की चिंताएं
हालांकि, एक्सपर्ट्स को इस बड़े टारगेट की व्यावहारिकता पर संदेह है। उनका कहना है कि सिर्फ आक्रामक वसूली से काम नहीं चलेगा, बल्कि सतत आर्थिक विकास भी जरूरी है। अतीत में, ऐसी टैक्स रिकवरी ड्राइव्स ने व्यवसायों के लिए कैश फ्लो मैनेज करना मुश्किल बना दिया था, जिससे उनका कॉन्फिडेंस और निवेश पर असर पड़ा। AI और डेटा टूल्स जहां निगरानी सुधारेंगे, वहीं जटिल मामलों में नए विवाद भी खड़े कर सकते हैं।
व्यवसायों पर क्या हो सकता है असर?
FY26 के लक्ष्यों का चूकना दर्शाता है कि राजस्व पूर्वानुमान शायद बहुत ज्यादा थे या आर्थिक विकास टैक्स बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में, बजट की कमी को पूरा करने के लिए सरकार को आक्रामक वसूली पर निर्भर रहना पड़ सकता है, जो आर्थिक रिकवरी के दौर में व्यवसायों को कमजोर कर सकती है। अतीत की सख्त टैक्स एनफोर्समेंट नीतियों ने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन या पॉलिसी बदलावों की चिंता पैदा करके विदेशी निवेश को हतोत्साहित किया है।
आगे क्या?
FY27 के लिए डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का कुल लक्ष्य ₹26.97 लाख करोड़ है। इस लक्ष्य को पाना लगातार आर्थिक विकास और नई रिकवरी विधियों के प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा।
