भारत की मजबूत ग्रोथ का अनुमान
IMF की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था 2027 तक हर साल 6.5% की दर से बढ़ेगी। यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज ग्रोथ होगी। IMF ने FY25 के लिए ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.6% कर दिया है, जबकि 2026 में ग्लोबल इकोनॉमी की रफ्तार 3.1% रहने का अनुमान है। भारत की यह मजबूत परफॉरमेंस घरेलू मांग और स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स का नतीजा है। वहीं, 2026 में यूरोजोन की ग्रोथ 0.9% और चीन की 4.4% रहने की उम्मीद है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2025 की चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही। S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने भी FY27 के लिए अपना अनुमान 7.1% किया है।
एनर्जी शॉक से बढ़ा महंगाई का खतरा
लेकिन, पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, जो गंभीर हालात में 2026 तक $130 प्रति बैरल तक जा सकती है, भारत की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है। भारत अपनी जरूरत का 80-90% तेल आयात करता है। ऐसे में, तेल की हर $10 की बढ़ोतरी से देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) GDP का 0.4% बढ़ सकता है। अनुमान है कि FY27 तक CAD बढ़कर GDP का 1.8% हो सकता है। इस एनर्जी शॉक के कारण महंगाई के अनुमानों को भी ऊपर ले जाया गया है। OECD को FY27 में महंगाई 5.1% रहने का अनुमान है, जबकि IMF का अनुमान 2026 में 4.7% और 2027 में 4% है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 4% के महंगाई लक्ष्य ( 2-6% बैंड) को पाना चाहता है, पर यह मुश्किल हो सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपया पहले ही रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है और विदेशी निवेशकों की चिंताएं बढ़ने से इसमें और गिरावट आ सकती है।
नीति निर्माताओं के सामने कठिन राह
भारतीय नीति निर्माताओं के सामने ग्रोथ को सहारा देने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है। सरकार की फिस्कल कंसॉलिडेशन (राजकोषीय समेकन) की प्रतिबद्धता पर भी आंच आ सकती है, क्योंकि उपभोक्ताओं को तेल की ऊंची कीमतों से बचाने के लिए उठाए जाने वाले कदम सरकारी राजस्व पर दबाव डाल सकते हैं। FY27 के लिए 4.3% GDP के फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य को पाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $687 बिलियन से अधिक है, जो एक मजबूत सहारा देता है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी को इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन (आयातित महंगाई) के जोखिम और इकोनॉमिक ग्रोथ की जरूरत के बीच संतुलन बनाना होगा।
आर्थिक जोखिम
मजबूत आर्थिक बुनियाद के बावजूद, बाहरी झटके कई जोखिम पैदा कर रहे हैं। S&P ग्लोबल रेटिंग्स, जिसने भारत की BBB सॉवरेन रेटिंग को स्टेबल (स्थिर) रखा है, का कहना है कि लंबे समय तक ऊंचा एनर्जी प्राइसेस कुछ कंपनियों की क्रेडिट क्वालिटी को कमजोर कर सकता है। अगर 2026 में तेल की कीमतें $130 प्रति बैरल रहती हैं, तो FY27 में कॉर्पोरेट EBITDA में 15-25% तक की गिरावट आ सकती है, जिससे कर्ज का स्तर बढ़ जाएगा। रिफाइनिंग, एयरलाइंस, सीमेंट, मेटल और स्टील जैसे सेक्टर पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है। इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आएगा, और इसका असर आम ग्राहकों की डिस्पोजेबल इनकम पर भी पड़ सकता है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) बढ़ने का खतरा भी रहेगा। ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए भारत की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता एक बड़ी कमजोरी बनी हुई है।
भविष्य की ग्रोथ की राह
भविष्य में भी भारत के ग्लोबल इकोनॉमी में एक प्रमुख परफॉर्मर बने रहने की उम्मीद है, IMF के 6.5% ग्रोथ के अनुमान 2027 तक जारी रहने की संभावना है। हालांकि, यह ग्रोथ भू-राजनीतिक परिदृश्य और एनर्जी मार्केट पर इसके असर को संभालने पर निर्भर करेगी। S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने FY27 के लिए 7.1% ग्रोथ का आशावादी अनुमान लगाया है, जबकि कुछ अन्य विश्लेषकों को एनर्जी प्राइसेस के दबाव के कारण ग्रोथ 6.5% तक धीमी होने की आशंका है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत कैसे अपनी मजबूत घरेलू मांग को आयातित महंगाई और बाहरी भुगतान चुनौतियों के बीच संतुलित करता है। इन जटिल वैश्विक जोखिमों पर उसकी नीतिगत प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।