ग्लोबल रेटिंग एजेंसी की नजर में भारत की इकॉनमी
Moody's का यह 6.4% का ग्रोथ रेट अनुमान, भले ही G20 देशों में सबसे तेज रफ्तार का हो, लेकिन यह भारत के लिए पिछले 4 सालों की सबसे धीमी आर्थिक वृद्धि को दर्शाता है। यह अनुमान लगातार हो रहे स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स, टैक्स में कटौती (जैसे GST और इनकम टैक्स), और स्थिर मॉनेटरी पॉलिसी जैसे कारकों को सपोर्ट के तौर पर देखता है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने FY2025-26 के लिए अपने GDP ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 7.4% कर दिया है, जो नज़दीकी अवधि के अनुमानों में अंतर को दिखाता है।
बैंकिंग सेक्टर में तेजी और SBI का वैल्यूएशन
इस अनुमान के बीच, भारतीय फाइनेंशियल स्टॉक्स में जबरदस्त तेजी देखी गई, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे आगे रहा। SBI, देश का सबसे बड़ा लेंडर, अभी लगभग 11.8x के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹9.84 लाख करोड़ है। इसकी तुलना में, HDFC बैंक का P/E लगभग 19.4x और ICICI बैंक का 19.9x है। SBI का 11.8x का P/E इसे इन बड़े बैंकों के मुकाबले काफी आकर्षक बनाता है। उम्मीद है कि आने वाले फाइनेंशियल ईयर (FY26-27) में बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी और मार्जिन में सुधार होगा, क्योंकि NIMs (Net Interest Margins) बढ़ेंगे और क्रेडिट ग्रोथ स्टेबल रहेगी। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) के मार्च 2027 तक घटकर 1.9% रहने का अनुमान है, जो सितंबर 2025 में 2.1% था। सरकार का पब्लिक सेक्टर बैंकों को सपोर्ट और टैक्स रिफॉर्म्स (जैसे सितंबर 2025 से 5% और 18% की नई GST स्लैब और FY26 के लिए इनकम टैक्स छूट) से डोमेस्टिक डिमांड और कंपनियों की कमाई को बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
नरमी की चिंताएं और बाहरी जोखिम
हालांकि, Moody's का 6.4% का आंकड़ा, जो डोमेस्टिक अनुमानों से कम है, थोड़ा चिंताजनक है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर का अनुमान लगभग 7.4% का है। यह बताता है कि या तो तात्कालिक आर्थिक रफ्तार का अनुमान ज्यादा लगाया गया है या फिर आने वाली दिक्कतों को कम आंका गया है। प्राइवेट सेक्टर का कैपिटल एक्सपेंडिचर अभी भी धीमा है, जो टिकाऊ, व्यापक ग्रोथ के लिए एक बड़ी चिंता है। इसके अलावा, ग्लोबल टेंशन, ट्रेड में रुकावटें, और अस्थिर फाइनेंशियल मार्केट्स बड़े खतरे हैं। 2027 तक रिटेल इन्फ्लेशन के 4% तक पहुंचने की संभावना, और अनसिक्योर्ड लेंडिंग सेगमेंट में क्रेडिट क्वालिटी से जुड़ी चिंताएं बैंकिंग सेक्टर के लिए और चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs), जो 2025 की शुरुआत में नेट सेलर थे, हो सकता है कि वे ज्यादा बेहतर रिटर्न के लिए US स्टॉक्स की ओर रुख करें, जिससे भारतीय मार्केट्स में इनफ्लो सीमित हो सकता है।
भविष्य का नज़रिया और एनालिस्ट्स की राय
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लिए एनालिस्ट्स की कंसेंसस रेटिंग "मॉडरेट बाय" (Moderate Buy) है, जिसका एवरेज 12-महीने का टारगेट प्राइस लगभग ₹1,123.00 है। यह मौजूदा भाव से लगभग 5.14% की मामूली बढ़ोतरी का संकेत देता है। यह आउटलुक बताता है कि ग्रोथ में नरमी और बाहरी फैक्टर्स के जोखिमों को स्वीकार किया गया है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर की फंडामेंटल मजबूती और SBI की वैल्यूएशन को एनालिस्ट्स सपोर्ट कर रहे हैं। फरवरी 2026 में RBI का रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखना, ग्रोथ और इन्फ्लेशन के बीच संतुलन का संकेत देता है। यह दर्शाता है कि RBI भी फिस्कल स्टिमुलस के पूरे असर का इंतजार कर रहा है।