लक्ष्य प्राप्ति, पर असल तस्वीर क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य पूरा कर लिया है। इस उपलब्धि से किसानों को सीधा फायदा होगा और देश के कीमती फॉरेन एक्सचेंज (Foreign Exchange) की बचत भी होगी।
तेल आयात पर निर्भरता और बढ़ी
लेकिन, इस सफलता के बावजूद, देश की कच्चे तेल (Crude Oil) पर निर्भरता कम नहीं हुई है, बल्कि बढ़ गई है। जहाँ पहले भारत अपनी 84% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता था, वहीं अब यह आंकड़ा 90% को पार कर गया है। इसका सीधा मतलब है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का बड़े तेल आयात को कम करने पर सीमित असर ही दिख रहा है।
बचत कितनी, और क्या है असली चिंता?
सरकार का अनुमान है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से सालाना करीब $3 बिलियन (लगभग ₹25,000 करोड़) की बचत हो रही है। लेकिन, यह आंकड़ा भारत के कुल सालाना तेल आयात बिल का केवल 2% से 3% ही है। चिंता की बात यह है कि भू-राजनीतिक तनावों के चलते, कच्चे तेल की कीमतें $115 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं, जिससे आयात लागत और भी बढ़ गई है।