India's 2060 GDP Forecast: The Productivity Reality Check

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India's 2060 GDP Forecast: The Productivity Reality Check
Overview

साल **2060** तक भारत की जीडीपी चीन से आगे निकलने के अनुमान तो लग रहे हैं, लेकिन यह सब देश की प्रोडक्टिविटी (Productivity) की खाई को पाटने और मानव पूंजी में निवेश करने पर निर्भर करेगा। चीन की गिरती जनसंख्या एक बड़ी वजह है, लेकिन भारत को सिर्फ जनसंख्या से आगे बढ़ना नहीं है, बल्कि इसके लिए बड़े स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स (Structural Reforms) की जरूरत होगी।

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जनसंख्या का 'सीलिंग' बनाम पॉलिसी की हकीकत

साल 2060 तक भारत का दुनिया की आर्थिक शक्ति के तौर पर उभरना, चीन की घटती जनसंख्या के कारण ज़्यादा दिख रहा है, न कि भारत के खुद के आर्थिक उछाल की वजह से। वर्ल्ड इनइक्वालिटी लैब (World Inequality Lab) भले ही क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity) रैंकिंग में बड़ा बदलाव दिखा रही हो, लेकिन निवेशकों को सिर्फ जीडीपी (GDP) का आकार और असल दौलत बनाने के बीच का फर्क समझना चाहिए। चीन का कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-intensive) विस्तार अब एक दीवार से टकरा रहा है, क्योंकि उसकी कामकाजी आबादी में भारी गिरावट आने का अनुमान है। ऐसे में, चीन को आउटपुट की मात्रा से हटकर टोटल फैक्टर प्रोडक्टिविटी (Total Factor Productivity) पर निर्भर रहना होगा, जिसे अभी पूरी तरह हासिल नहीं किया गया है।

स्ट्रक्चरल प्रोडक्टिविटी गैप

आर्थिक बराबरी का भारत का रास्ता अभी भी एक लगातार बने हुए प्रोडक्टिविटी लैग (Productivity Lag) से जूझ रहा है, जो इसे उसके उत्तरी पड़ोसी से अलग करता है। रिसर्च बताती है कि भले ही भारत को युवा आबादी का फायदा (Demographic Dividend) मिल रहा हो, लेकिन ऐतिहासिक तौर पर यह अपनी मानव पूंजी को हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग (High-value manufacturing) या सर्विस-सेक्टर (Service-sector) में बदलने में संघर्ष करता रहा है, खासकर उस पैमाने पर जिसकी वैश्विक नेतृत्व के लिए ज़रूरत है। 2000 के दशक की शुरुआत में चीन में हुए इन्वेस्टमेंट-लेड इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ (Investment-led infrastructure growth) के विपरीत, भारत का ग्रोथ मॉडल ज़्यादातर घरेलू खपत पर आधारित है। इससे अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों से तो बच जाती है, लेकिन एक दूसरी चुनौती खड़ी होती है: मौजूदा आय असमानता (Income Inequality) को बढ़ाए बिना उच्च विकास दर बनाए रखने का संघर्ष, जो भारत में चीनी मॉडल की तुलना में काफी ज़्यादा है।

संस्थागत विकास में ठहराव का जोखिम

भारत के लिए सबसे बड़ा संस्थागत जोखिम कैपिटल (Capital) के कंसंट्रेशन (Concentration) और पूर्वी एशिया में देखे गए तेज़ डेवलपमेंट साइकल्स (Developmental cycles) की तुलना में टर्शियरी एजुकेशन (Tertiary education) और पब्लिक हेल्थ (Public health) में कम निवेश है। अगर लंबी अवधि के मॉडलों में बताई गई जीडीपी हिस्सेदारी को हासिल करना है, तो भारत को लेबर मार्केट फ्लेक्सिबिलिटी (Labor market flexibility) और इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स (Infrastructure logistics) को टारगेट करने वाले कई रिफॉर्म्स (Reforms) करने होंगे। इन बाधाओं को दूर करने में विफलता 'मिडिल-इनकम ट्रैप' (Middle-income trap) का कारण बन सकती है, जिससे बड़ी कामकाजी आबादी का प्रभाव कम हो सकता है। इसके अलावा, सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स (Sustainable manufacturing standards) की ओर वैश्विक बदलाव ऐसे खर्चे लगा सकता है जो उभरते बाजारों पर चीन पहले ही झेल चुका है, जिससे भारत की चढ़ाई में एक फिस्कल कॉम्प्लेक्सिटी (Fiscal complexity) जुड़ जाएगी।

भविष्य की राह और आर्थिक मल्टी-पोलैरिटी (Multi-polarity)

आखिरकार, वैश्विक आर्थिक व्यवस्था एक एकल शक्ति के बीजिंग से नई दिल्ली में ट्रांसफर होने के बजाय एक खंडित, मल्टी-पोलर (Multi-polar) स्थिति की ओर बढ़ रही है। 2060 के अनुमान एक अपेक्षाकृत स्थिर भू-राजनीतिक (Geopolitical) और व्यापारिक माहौल मानते हैं, जो कि वर्तमान में प्रोटेक्शनिस्ट ट्रेड पॉलिसीज़ (Protectionist trade policies) और सप्लाई चेन लोकलाइजेशन (Supply chain localization) की ओर बढ़ते रुझान को देखते हुए एक महत्वपूर्ण अनुमान है। समझदार निवेशक के लिए, फोकस कैपिटल फॉर्मेशन (Capital formation) और आर एंड डी (R&D) खर्च से जुड़े तिमाही डेटा पॉइंट्स पर बना रहना चाहिए, जो यह जानने के प्राथमिक संकेतक होंगे कि भारत इन दशकों के लक्ष्यों को पूरा करेगा या चूक जाएगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.