मध्य पूर्व में ताजा तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जो करीब $96 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह ग्लोबल झटका सीधे तौर पर महंगाई (Inflation) को बढ़ावा देता है। इसी का नतीजा है कि भारत की 10-साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड (Government Bond Yield) बढ़कर 6.91% पर पहुंच गई है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए महंगाई का अनुमान 4.6% लगाया था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे RBI की आगे और ब्याज दरें (Interest Rates) घटाने की गुंजाइश कम हो जाएगी और पॉलिसी फिलहाल जस की तस रह सकती है। भारतीय रुपया (Indian Rupee) डॉलर के मुकाबले 92.70 के आसपास कारोबार कर रहा है, जिसमें RBI के हस्तक्षेप से कुछ स्थिरता दिख रही है, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें दबाव बना रही हैं।
बाहरी दबावों के अलावा, घरेलू स्तर पर भी उधार की सप्लाई बढ़ने वाली है। राज्य सरकारें 21 अप्रैल को ₹16,900 करोड़ के बॉन्ड की नीलामी करने की योजना बना रही हैं, जो पहले के ₹11,500 करोड़ के अनुमान से काफी ज्यादा है। यह बड़ा उधार बॉन्ड की कीमतों को और नीचे धकेल सकता है और यील्ड को और बढ़ा सकता है, खासकर तब जब बाजार में लिक्विडिटी (Liquidity) पहले से ही टाइट है। हालांकि, कुछ अन्य देशों की तुलना में भारत की यील्ड स्प्रेड (Yield Spread) अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasuries) के मुकाबले अभी भी कम है, जो लगभग 2.61% है, जबकि ब्राजील का 9.39% और दक्षिण अफ्रीका का 4.19% है।
यह भू-राजनीतिक घटनाएं और बढ़ती तेल की कीमतें भारत के लिए स्टैगफ्लेशन (Stagflation) का सीधा जोखिम पैदा कर रही हैं – यानी धीमी आर्थिक ग्रोथ के साथ-साथ ऊंची महंगाई। S&P का अनुमान है कि FY27 में महंगाई 4.3% तक पहुंच सकती है। इस परिदृश्य में RBI को आर्थिक ग्रोथ में नरमी के बावजूद ब्याज दरों को स्थिर रखने या बढ़ाने पर भी विचार करना पड़ सकता है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भी सप्लाई शॉक का हवाला देते हुए 2026 के लिए महंगाई के अपने अनुमान को बढ़ाकर 4.6% कर दिया है। S&P का कहना है कि यदि 2026 में ब्रेंट क्रूड $130 प्रति बैरल के औसत पर रहता है, तो भारत की ग्रोथ 0.8% धीमी हो सकती है, कॉर्पोरेट प्रॉफिट में 15-25% की गिरावट आ सकती है, और बैंकों के बैड लोंस (Bad Loans) बढ़कर 3.5% तक पहुंच सकते हैं।
मौजूदा नकारात्मक माहौल और भू-राजनीतिक तनावों के कारण RBI के पास बॉन्ड की कीमतों को सक्रिय रूप से सहारा देने की क्षमता सीमित है। विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) ने हाल ही में भारतीय सरकारी बॉन्ड बेचे हैं, जो जोखिम भरी संपत्तियों से दूरी बनाने का संकेत है, जैसा कि पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देखा गया था, जब भारतीय यील्ड में कुछ हफ्तों में करीब 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई थी।
निवेशक अब RBI की नवीनतम मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) मीटिंग के मिनट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि केंद्रीय बैंक के इन उभरते जोखिमों पर विचारों और भविष्य की पॉलिसी दिशा का पता चल सके। भले ही IMF ने भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ को FY27 के लिए 6.5% पर मजबूत रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन तेल की कीमतों में लगातार ऊपरी दबाव और घरेलू सरकारी उधार कार्यक्रम यह संकेत देते हैं कि बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। अनुमानों के अनुसार, यह दिसंबर 2026 तक 7.3% तक पहुंच सकती है। बॉन्ड मार्केट की निकट अवधि की दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व में तनाव कम होने और घरेलू फिस्कल मैनेजमेंट (Fiscal Management) की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी।
