शेयर बाज़ार में भारी गिरावट: जियो-पॉलिटिकल टेंशन और बढ़ते तेल के दाम बने वजह

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
शेयर बाज़ार में भारी गिरावट: जियो-पॉलिटिकल टेंशन और बढ़ते तेल के दाम बने वजह
Overview

पश्चिम एशिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तूफानी तेजी के कारण आज भारतीय शेयर बाज़ार में भारी गिरावट दर्ज की गई। **Nifty 50** **24,000** के नीचे फिसल गया, वहीं **Sensex** में **417** अंकों की कमजोरी आई।

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जियो-पॉलिटिकल टेंशन और तेल के दामों में आग ने बाज़ार को किया बेहाल

आज 28 अप्रैल 2026 को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क, Nifty 50 और Sensex, व्यापक बिकवाली के दबाव में आ गए। यह सेशन बढ़ते जियो-पॉलिटिकल डर और कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर आई तेजी से चिह्नित हुआ। Nifty 50 97 अंक यानी 0.40% की गिरावट के साथ 23,995.70 पर बंद हुआ, जबकि Sensex 416.72 अंक यानी 0.54% गिरकर 76,886.91 पर आ गया। इस बाज़ार में गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का रुकना रहा, जिसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खतरे में डाला और ब्रेंट क्रूड की कीमतों को $111 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया। ऊर्जा की बढ़ती लागतों ने सीधे तौर पर भारत की आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ीं और निवेशकों का सेंटिमेंट (Sentiment) कमजोर हुआ। फाइनेंशियल, आईटी और ऑटो सेक्टर बिकवाली का बड़ा शिकार हुए, जिसमें Nifty Bank इंडेक्स 1.54% और IT इंडेक्स 0.7% गिरा।

छोटे और मिडकैप शेयरों में दिखी मजबूती

जहां बड़े इंडेक्सज़ में गिरावट देखी गई, वहीं ब्रॉडर मार्केट सेगमेंट में मजबूती का रुख दिखा। Nifty Midcap इंडेक्स 0.28% बढ़ा और Nifty Smallcap इंडेक्स 0.42% चढ़ा। इससे यह संकेत मिलता है कि ग्लोबल अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की भावनाओं से बड़े शेयरों पर दबाव होने के बावजूद, घरेलू निवेशक छोटी कंपनियों में वैल्यू ढूंढते रहे। सेक्टोरल लेवल पर, Nifty Energy इंडेक्स 1.22% और Oil & Gas इंडेक्स 1.5% चढ़ा, जो बढ़ती क्रूड कीमतों से लाभान्वित हुए। Metal इंडेक्स ने भी 0.5% का गेन दर्ज किया, संभवतः कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के चलते। इस बीच, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने अप्रैल के पहले ग्यारह दिनों में लगभग ₹48,905 करोड़ निकाले। इससे इस साल अब तक कुल ₹1.8 लाख करोड़ से ज़्यादा की निकासी हो चुकी है, जो ग्लोबल निवेशकों के सतर्क रवैये को दर्शाता है। हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) लगातार शेयर खरीद रहे हैं, जो FIIs की बिकवाली के खिलाफ एक अहम सपोर्ट दे रहे हैं।

बाज़ार के लिए बड़े खतरे: जियो-पॉलिटिक्स, FII आउटफ्लो और रुपया

पश्चिम एशिया में लगातार बना जियो-पॉलिटिकल तनाव भारतीय बाज़ारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। यदि तनाव बढ़ता है या शांति वार्ता असफल होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी और भारत के व्यापार घाटा (Trade Deficit) में इजाफा होगा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की लगातार हो रही बड़ी निकासी, जो इस साल अब तक लगभग ₹1.8 लाख करोड़ तक पहुँच चुकी है, भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रति निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी का संकेत देती है। वहीं, ₹94.37 के स्तर पर खुला कमजोर होता भारतीय रुपया भी निवेशकों के रिटर्न को कम कर रहा है और आयात लागत बढ़ा रहा है। एनालिस्ट्स (Analysts) Nifty के लिए 23,800-23,850 के सपोर्ट लेवल पर कड़ी नज़र बनाए हुए हैं।

बाज़ार का नज़रिया: अस्थिरता जारी रहने की उम्मीद

बाजार का सेंटिमेंट (Sentiment) जियो-पॉलिटिकल डेवलपमेंट (Development) और क्रूड ऑयल प्राइस (Crude Oil Price) की चाल से काफी प्रभावित रहने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाज़ार में थोड़ी नरमी आ चुकी है, लेकिन यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता तो यह और बढ़ सकती है। इस बीच, बढ़ती क्रूड कीमतों और FIIs की लगातार बिकवाली के चलते सतर्क रुख बनाए रखना ज़रूरी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.