बाजार में दिखी जोरदार रौनक
बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार रौनक दिखी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स (Sensex) करीब 2,988 अंक उछलकर 77,605 के स्तर को पार कर गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी (Nifty) भी लगभग 890 अंक बढ़कर 24,000 के ऊपर निकल गया। इस तूफानी तेजी की मुख्य वजह अमरीका और ईरान के बीच हुआ दो हफ्ते का सीजफायर था, जिसने भू-राजनीतिक तनाव को कम किया। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) में 13% से ज्यादा की गिरावट आई और यह लगभग $94.44 प्रति बैरल पर आ गया, क्योंकि सप्लाई में रुकावट का डर कम हो गया। एशियाई बाजारों में भी शानदार तेजी देखी गई, जहां साउथ कोरिया का कोस्पी (Kospi) करीब 7% और जापान का निक्केई (Nikkei 225) 5% से ज्यादा चढ़ा। इस पॉजिटिव माहौल ने भारतीय लार्ज-कैप स्टॉक्स में जबरदस्त खरीदारी को बढ़ावा दिया।
RBI का सतर्क रुख: रेट होल्ड से संकेत
बाजार की इस खुशी के उलट, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। यह फैसला उम्मीद के मुताबिक था, लेकिन गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सतर्क टिप्पणियां कीं। केंद्रीय बैंक ने अपनी सतर्कता का कारण लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता, महंगाई का संभावित जोखिम और ग्रोथ संबंधी चिंताएं बताईं। यह दर्शाता है कि तत्काल राहत के बावजूद, अर्थव्यवस्था की अंदरूनी कमजोरियां अभी भी नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय हैं। RBI का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) में कच्चे तेल की औसत कीमत $85 प्रति बैरल रहेगी और रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 94 के स्तर पर बना रहेगा, जो बाहरी आर्थिक दबावों को दर्शाता है।
सेक्टर्स में मिला-जुला असर
बाजार में व्यापक तेजी के बावजूद, सेक्टोरल प्रदर्शन मिला-जुला रहा। इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) 10% के करीब बढ़कर सबसे ज्यादा फायदे में रहा, क्योंकि सस्ते क्रूड ऑयल से एविएशन फ्यूल की लागत कम होने का फायदा मिला। दूसरी ओर, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर की बड़ी कंपनियों जैसे लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro), बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance), मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki), अल्ट्राटेक सीमेंट (UltraTech Cement) और महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) में भी अच्छी तेजी देखी गई, जो बेहतर आर्थिक सेंटीमेंट का नतीजा हो सकती है। हालांकि, टेक्नोलॉजी और फार्मा सेक्टर में कमजोरी दिखी। टेक महिंद्रा (Tech Mahindra), सन फार्मा (Sun Pharma) और पावर ग्रिड (Power Grid) जैसी कंपनियों के शेयर पिछड़ते दिखे, जो बताता है कि पॉजिटिव मैक्रो खबरों के बावजूद सेक्टर-विशिष्ट चुनौतियां बनी हुई हैं। आईटी सेक्टर को डिमांड में सुस्ती और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जबकि फार्मा कंपनियां प्राइसिंग प्रेशर और रेगुलेटरी जांच से जूझ रही हैं।
बड़ी चिंताओं से ऐसे निपटेगा बाजार
सीजफायर से आई तेजी के बावजूद, बाजार में कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। RBI का महंगाई पर जोर देना यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था कच्चे तेल के आयात पर कितनी निर्भर है। हालांकि ब्रेंट क्रूड के दाम गिरे हैं, वे अभी भी मार्च 2026 में $100 प्रति बैरल के पार जाने के स्तर से काफी ऊपर हैं। भारतीय रुपये पर भी दबाव बना हुआ है, जो फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में कमजोर हुआ था और अभी भी अस्थिर है। मंगलवार को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने ₹8,692 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹7,979 करोड़ के शेयर खरीदे। अगर महंगाई बढ़ती है या वैश्विक मांग कमजोर होती है, तो ऑटो और इंफ्रा जैसे सेक्टरों की रिकवरी प्रभावित हो सकती है। इससे पहले, 4 अप्रैल 2025 को अमरीकी टैरिफ की चिंताओं के कारण बाजार में आई गिरावट इस बात का उदाहरण है कि भू-राजनीतिक बदलावों के प्रति सेंटीमेंट कितना संवेदनशील है।
आगे क्या? उम्मीदें और चुनौतियां
फिलहाल, जानकारों को उम्मीद है कि निफ्टी 24,000 के स्तर को छू सकता है और फाइनेंशियल स्टॉक्स में भी रिकवरी आ सकती है। हालांकि, RBI की सतर्कता एक रिमाइंडर है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से मैक्रोइकॉनॉमिक चिंताएं खत्म नहीं होतीं। बाजार में इस तेजी को बनाए रखने के लिए भू-राजनीतिक स्थिरता और महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।