Indian Stocks Surge: मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद, शेयर बाज़ार में रिकॉर्ड तेज़ी!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Stocks Surge: मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद, शेयर बाज़ार में रिकॉर्ड तेज़ी!
Overview

मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीदों और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाज़ार में आज ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। सेंसेक्स (Sensex) **912** अंकों से ज़्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी (Nifty) भी **309** अंकों की बढ़त के साथ खुला।

बाज़ार में क्यों आई तेज़ी?

25 मार्च, 2026 को भारतीय बाज़ार में शानदार रिकवरी देखने को मिली। पिछले कुछ दिनों से भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में उथल-पुथल से परेशान निवेशकों ने आज राहत की सांस ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीदें बढ़ने और संभावित युद्धविराम की खबरों से बाज़ार में तेज़ी का माहौल बना।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर

इस तेज़ी की सबसे बड़ी वजह बनीं मिडिल ईस्ट से आ रही सकारात्मक खबरें, जिनसे भू-राजनीतिक जोखिम कम हुआ। इसके चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट आई, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $100 प्रति बैरल के नीचे चला गया। तेल की कीमतों में यह नरमी सीधे तौर पर भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए महंगाई और इंपोर्ट कॉस्ट (Import Cost) को कम करने वाली साबित हुई।

बाज़ार का विस्तृत हाल

आज सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 74,969.87 के स्तर पर 912.99 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था, वहीं निफ्टी 23,220.55 पर 309.15 अंकों की मजबूती के साथ था। लगभग सभी सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, खासकर निफ्टी रियलिटी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया में ज़बरदस्त तेज़ी रही, हालांकि निफ्टी आईटी (IT) थोड़ा पीछे रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का मार्केट कैप ₹7.65 लाख करोड़ बढ़कर ₹430.43 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

यह रिकवरी ऐसे समय में आई है जब इस महीने 24 मार्च, 2026 तक फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) करीब ₹1 लाख करोड़ की बिकवाली कर चुके थे। इसके बावजूद, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) की लगातार खरीदारी ने बाज़ार को संभाले रखा।

आर्थिक चिंताएं अभी भी हावी

हालांकि, बाज़ार में तेज़ी के बावजूद कुछ आर्थिक चिंताएं बनी हुई हैं। मार्च 2026 में भारत की प्राइवेट सेक्टर एक्टिविटी (Private Sector Activity) पिछले करीब साढ़े तीन सालों के सबसे धीमे स्तर पर पहुंच गई, जैसा कि HSBC Flash India Composite PMI Output Index 56.5 पर आ गया। यह मंदी घरेलू मांग में कमी और इनपुट कॉस्ट (Input Cost) बढ़ने के कारण है, जिसमें मिडिल ईस्ट जैसे घटनाक्रमों ने और बढ़ोतरी की है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने ऊंचे तेल के दाम और करेंसी में गिरावट के चलते 2026 के लिए भारत की ग्रोथ फोरकास्ट (Growth Forecast) घटाकर 5.9% कर दी है। फर्म का यह भी मानना है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 50 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि कर सकता है।

आगे की राह: भू-राजनीतिक संकेतों पर निर्भर

विश्लेषकों का मानना है कि भले ही निवेशकों का सेंटिमेंट (Sentiment) सुधरा हो, लेकिन बाज़ार की दिशा अभी भी बाहरी कारकों, जैसे मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम, तेल की कीमतें और FIIs के फ्लो (Flow) पर निर्भर रहेगी। अगर शांति की कोशिशें जारी रहती हैं तो बाज़ार को और मजबूती मिल सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए वोलैटिलिटी (Volatility) बनी रह सकती है।

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