मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे ने भारतीय शेयर बाजारों पर भारी दबाव बना दिया है। April 6, 2026 को कारोबार की शुरुआत में ही Sensex और Nifty दोनों प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी देखी गई। यह गिरावट April 1, 2026 को बाजार में आई तेजी के बिल्कुल विपरीत थी, जब भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते Sensex 73,134.32 और Nifty 22,679.40 के स्तर पर बंद हुए थे।
इस बार, निवेशकों की उम्मीदें धराशायी हो गईं क्योंकि मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता का माहौल गहराता गया। इससे कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल आया, जिससे महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ गईं। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से लगातार की जा रही बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव को और बढ़ा दिया।
हालांकि, बाजार में हर तरफ निराशा नहीं थी। Banking और IT जैसे कुछ सेक्टरों ने अपनी मजबूती बनाए रखी। Nifty PSU Bank सेक्टर में खासतौर पर खरीदारी दिखी। दूसरी ओर, ऊर्जा की बढ़ती लागत के कारण Oil & Gas सेक्टर में बिकवाली का दबाव रहा। Auto और Metals जैसे सेक्टर भी कमोडिटी की कीमतों में बदलाव और वैश्विक मांग के संकेतों पर प्रतिक्रिया देते नजर आए।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय इक्विटी में कमजोरी को और तेज कर रही है, जिससे लिक्विडिटी (Liquidity) कम हो रही है और वैल्यूएशन (Valuation) पर दबाव पड़ रहा है। बाजार की यह अस्थिरता बाहरी दबावों के प्रति हमारी संवेदनशीलता को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, April 7, 2025 को वैश्विक व्यापार युद्ध और मंदी की आशंकाओं के बीच Nifty 50 में 5.07% की बड़ी गिरावट आई थी। बाजार की अपेक्षित उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX अभी भी ऊंचा बना हुआ है, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।
फिलहाल, निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता जारी रहने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी नीतिगत बैठक पर भी सबकी नजरें होंगी, हालांकि अधिकांश को उम्मीद है कि ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी, लेकिन महंगाई के अनुमानों पर बारीक नजर रखी जाएगी। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाहरी अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपनाएं और स्पष्ट घरेलू आर्थिक संकेतों का इंतजार करें।