तेल की आग और भू-राजनीतिक तनाव ने बाज़ार को किया पस्त
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में $100 प्रति बैरल के पार जाने और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण 23 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex 852.49 अंकों की गिरावट के साथ 77,664 पर बंद हुआ, जो कि हाल के सत्रों में सबसे बड़ी पॉइंट वाली गिरावट थी। NSE Nifty 50 भी 205.05 अंक लुढ़क कर 24,173.05 पर बंद हुआ। बाज़ार में इस बिकवाली की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नाकेबंदी की आशंकाओं और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती दुश्मनी रही। कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड $103 प्रति बैरल को पार कर गया, जिससे महंगाई बढ़ने, भारत के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) के बढ़ने और भारतीय रुपये के कमजोर होने की चिंताएं और बढ़ गईं। रुपया डॉलर के मुकाबले 94 के पार चला गया। बाज़ार की अस्थिरता को दर्शाने वाला India VIX इंडेक्स भी करीब 2% चढ़ गया।
सेक्टरों पर गिरी गाज, FIIs की बिकवाली जारी
बाज़ार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिसमें बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं जैसे हैवीवेट सेक्टर्स सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। इन सेक्टर्स के इंडेक्स 1% से अधिक गिरे। HDFC Bank, ICICI Bank, Bajaj Finance और Kotak Mahindra Bank जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में गिरावट ने बेंचमार्क को नीचे खींचा। ऑटो सेक्टर भी 2% से ज़्यादा लुढ़क गया, क्योंकि बढ़ी हुई तेल कीमतों से इन कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने और मांग में कमी आने की आशंका है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने भी सेंटीमेंट को और खराब किया; 22 अप्रैल 2026 को FIIs ने लगभग ₹2,078 करोड़ के शेयर बेचे। Nifty IT सेक्टर में भी कमजोरी दिखी, हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स ने कुछ हद तक स्थिरता बनाए रखी। वैश्विक स्तर पर भी एशिआई बाज़ार गिरे, जिनमें जापान का Nikkei और हांगकांग का Hang Seng भी शामिल थे।
ऊंची तेल कीमतों से अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल से ऊपर बना रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 (FY27) में देश की GDP ग्रोथ और कंपनियों के मुनाफे पर गंभीर असर पड़ सकता है। यह आयात पर निर्भरता महंगाई को और बढ़ाएगी, चालू खाते के घाटे को चौड़ा करेगी और रुपये पर लगातार दबाव बनाए रखेगी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 2026 में अब तक लगभग $18.5 बिलियन की बिकवाली की है, जिसने बाज़ार की लिक्विडिटी और सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। HSBC के विश्लेषकों ने मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय शेयरों पर 'अंडरवेट' रेटिंग दी है और FY27 के लिए कमाई के अनुमानों (earnings outlook) को लेकर आशंका जताई है। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे भू-राजनीतिक तनाव और तेल झटकों के दौर में बाज़ार में बड़ी गिरावट देखी गई है।
आगे क्या? अस्थिरता की उम्मीद
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाज़ार में अस्थिरता (volatility) बनी रह सकती है, क्योंकि भू-राजनीतिक घटनाएं और तेल की कीमतें ही बाज़ार की दिशा तय करेंगी। Nifty 50 को 24,300–24,400 के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है, जबकि 23,900 के स्तर के नीचे फिसलने पर और गिरावट आ सकती है। निवेशकों को मध्य पूर्व के तनाव में कमी, तेल की कीमतों में स्थिरता और विदेशी बिकवाली के मुकाबले घरेलू खरीददारी पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए।
