भारतीय शेयर बाजार: बढ़त घटी, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, निवेशकों में चिंता

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारतीय शेयर बाजार: बढ़त घटी, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, निवेशकों में चिंता
Overview

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। Nifty 50 **0.51%** चढ़कर **24,119** पर बंद हुआ, जबकि Sensex **0.46%** की बढ़त के साथ **77,269** पर रहा। शुरुआत में, बीजेपी की राज्य चुनाव जीत और अप्रैल के मजबूत ऑटो बिक्री डेटा से बाजार को सहारा मिला था। लेकिन, दिन के उच्चतम स्तर से वापसी और भारतीय रुपये के US डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड **95.23** के स्तर पर गिरने से ये बढ़त काफी कम हो गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने घरेलू उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

बाजार में दिखी मिली-जुली तस्वीर, क्यों घटी बढ़त?

सोमवार को शेयर बाजार में मिली-जुली तस्वीर दिखी। घरेलू सकारात्मक संकेतों के बावजूद, बाहरी दबाव हावी रहा। शुरुआती कारोबार में जहां चुनावी नतीजों और मजबूत ऑटो बिक्री के आंकड़ों ने बाजार को रफ्तार दी थी, वहीं दिन के अंत में बिकवाली और रुपये की तेज गिरावट ने इन शुरुआती बढ़त को फीका कर दिया। बाजार का अपने उच्चतम स्तरों को बनाए न रख पाना, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों की बढ़ती सावधानी को दर्शाता है।

चुनाव की खुशी फीकी, Nifty को रेजिस्टेंस से झटका

Nifty 50 इंडेक्स दिन के कारोबार में 24,290 के स्तर तक पहुंचा, लेकिन अंत में 24,119 पर बंद हुआ। शुरुआती तेजी की वजह राज्य चुनावों के नतीजे, सकारात्मक ग्लोबल संकेत और अप्रैल के उम्मीद से बेहतर ऑटो बिक्री के आंकड़े थे, जिसमें थोक बिक्री में 33.3% और दोपहिया वाहनों की बिक्री में 38% की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, 24,300 के स्तर के पास इंडेक्स को लगातार बिकवाली दबाव का सामना करना पड़ा, जो एक मजबूत रेजिस्टेंस (resistance) साबित हुआ। इस कारण निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की, जिससे दिन की आधी बढ़त साफ हो गई।

रुपये की गिरावट और ग्लोबल संकेत

जहां भारतीय शेयर बाजार में कुछ नरमी रही, वहीं अन्य एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे इंडेक्स तकनीकी नतीजों के दम पर रिकॉर्ड हाई बना रहे थे। Nifty 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 20.91 के आसपास है, जो इसके लॉन्ग-टर्म एवरेज 21.58 के करीब है, यानी वैल्यूएशन्स (valuations) अभी भी ठीक-ठाक लग रहे हैं। साल 2024 में लिस्टेड भारतीय कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग $5.13 ट्रिलियन था। हालांकि, सबसे बड़ी चिंता भारतीय रुपये का डॉलर के मुकाबले 95.23 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरना है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मार्च-अप्रैल में विदेशी निवेशकों द्वारा $19 बिलियन की लगातार बिकवाली इसके प्रमुख कारण रहे। इस गिरावट को पिछली आर्थिक संकटों से भी जोड़ा जा रहा है। जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $108-110 प्रति बैरल पर बनी रहीं। वहीं, जियो-पॉलिटिकल जोखिमों से जुड़े गोल्ड (Gold) की कीमतें भी $4,600 प्रति औंस से नीचे आ गईं। हालांकि, अप्रैल में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन ₹2.43 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल से 8.7% ज्यादा है, लेकिन यह वृद्धि मुख्य रूप से इम्पोर्ट्स (imports) से आई है, न कि घरेलू खर्च से।

रुपया संभालने की कोशिश में RBI?

रुपये का यह रिकॉर्ड निचला स्तर अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी कमजोरी है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर दबाव बना रहा तो USD/INR 95.35-95.70 तक जा सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए पुराने संकटों से सीख रहा है और 2013 में इस्तेमाल की गई एनआरआई (NRI) डॉलर डिपॉजिट स्कीम जैसी योजनाओं को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाया जा सके। रुपये की यह गिरावट भारत के व्यापार संतुलन को प्रभावित करेगी और बड़े पैमाने पर इम्पोर्ट करने वाले देश के लिए महंगाई की चिंताएं भी बढ़ाएगी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला जारी है, जो इस साल 2026 में अब तक लगभग $20.6 बिलियन को पार कर गई है, यह 2025 के पूरे साल के आउटफ्लो से भी ज्यादा है। इससे बाजार की लिक्विडिटी (liquidity) और सेंटीमेंट (sentiment) पर बुरा असर पड़ रहा है। हालांकि मजबूत GST कलेक्शन अच्छी खबर है, लेकिन जैसा कि बताया गया, यह इम्पोर्ट पर ज्यादा निर्भर है, जो यह संकेत देता है कि घरेलू मांग टैक्स के आंकड़ों से कहीं ज्यादा धीमी गति से बढ़ रही है। यह इम्पोर्ट-आधारित ग्रोथ, हाई क्रूड ऑयल कीमतों के साथ मिलकर, अर्थव्यवस्था पर दोहरा दबाव डाल रही है।

आगे क्या है बाजार का हाल?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि Nifty 50 आने वाले समय में 23,800 और 24,300 के बीच कारोबार करेगा। 'Sell in May' (मई में बेचो) जैसी निवेश रणनीतियों को फिलहाल नजरअंदाज किया जा रहा है, लेकिन सावधानी बरतने की सलाह दी गई है: यानी, निवेशित रहें, लेकिन महंगे सेक्टर्स में मुनाफावसूली करते रहें। मुख्य जोखिमों में ग्लोबल ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव, अचानक भू-राजनीतिक घटनाएं और विभिन्न सेक्टर्स के लिए कमाई के अनिश्चित आउटलुक शामिल हैं। आने वाला Q4 अर्निंग्स सीजन (earnings season) स्टॉक-विशिष्ट उतार-चढ़ाव ला सकता है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.