अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आज सुबह **35 पैसे** की मजबूती देखी गई। रुपया **₹95.64** पर खुला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव कम होने से रुपये को यह सहारा मिला है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली जारी है।
Detailed Coverage
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर
आज सुबह के कारोबार में भारतीय रुपये ने अच्छी रिकवरी दिखाई है। डॉलर के मुकाबले रुपया 35 पैसे मजबूत होकर ₹95.64 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इससे पहले सोमवार को भी रुपये में 54 पैसे की मजबूती दर्ज की गई थी, जब यह ₹95.99 पर बंद हुआ था।
रुपये की यह मजबूती वैश्विक कमोडिटी (Commodity) बाजार और भू-राजनीतिक (Geopolitical) हलचल से जुड़ी है। भारत के लिए महत्वपूर्ण आयात, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil), 1.43% गिरकर $87.10 प्रति बैरल पर आ गया है। चूँकि भारत अपनी तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कम वैश्विक तेल कीमतों से इन आयातों के भुगतान के लिए डॉलर की मांग कम हो जाती है, जो आमतौर पर रुपये को मजबूत करती है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कम होने के बाद आई है। कूटनीतिक मध्यस्थों ने दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
डॉलर इंडेक्स में नरमी
इस ट्रेंड को वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) में आई नरमी का भी सहारा मिला है। यह इंडेक्स छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है। फिलहाल यह 0.06% गिरकर 101.31 पर कारोबार कर रहा है, जिससे रुपये जैसी उभरती बाजार मुद्राओं के लिए माहौल अनुकूल बना है।
घरेलू शेयर बाजार में भी हल्की सकारात्मक चाल देखी जा रही है। सेंसेक्स 14.66 अंक बढ़कर 76,850.44 पर और निफ्टी 27.10 अंक चढ़कर 24,023.45 पर खुला।
निवेशकों की नजर
करेंसी मार्केट में सकारात्मक माहौल के बावजूद, निवेशक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रुख पर नजर बनाए हुए हैं। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, FIIs सोमवार को ₹1,688.23 करोड़ की इक्विटी (Equity) की बिकवाली करते हुए नेट सेलर (Net Seller) रहे। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली स्थानीय मुद्रा पर दबाव बना सकती है, भले ही तेल की कीमतों जैसे बाहरी कारक सहायक दिख रहे हों।
आगे चलकर, बाजार प्रतिभागी वैश्विक तेल की कीमतों में किसी भी बदलाव और अमेरिका-ईरान कूटनीतिक संबंधों से जुड़ी किसी भी नई जानकारी पर नजर रखेंगे, क्योंकि ये कारक रुपये की स्थिरता और भारतीय शेयरों में विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित करना जारी रखेंगे।
