RBI की दखल ने बढ़ाई रुपये की रफ्तार
आज शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे की मजबूती के साथ 96.18 के स्तर पर पहुंच गया। इस उछाल की मुख्य वजह फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सीधी दखल मानी जा रही है। इसके अलावा, ईरान की स्थिति को लेकर कूटनीतिक प्रगति की खबरों ने भी बाजार का सेंटीमेंट (sentiment) बेहतर किया है, जिससे भू-राजनीतिक चिंताओं से कुछ राहत मिली है। पिछले कारोबारी दिन 96.36 पर बंद हुआ रुपया आज 96.30 पर खुला था।
घटती वैश्विक कीमतों से मिला सहारा
रुपये को मजबूत करने में एक बड़ा फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent crude futures) फिलहाल $104 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कमोडिटी की कीमतों में आई इस नरमी से डॉलर की मांग घटी है। वहीं, डॉलर इंडेक्स (Dollar Index), जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, में भी हल्की गिरावट देखी गई और यह 99.24 पर आ गया।
स्वैप नीलामी से लिक्विडिटी को मिलेगा बूस्ट
रुपये की रिकवरी को और मजबूती देने के लिए RBI 26 मई को $5 बिलियन की बाय-सेल स्वैप (buy-sell swap) नीलामी करने जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में काफी हद तक रुपये की लिक्विडिटी (liquidity) आएगी, जिससे केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएगा। यह RBI की सक्रियता को दर्शाता है कि अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं तो वह करेंसी की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए तैयार है।
इक्विटी मार्केट में भी दिखा पॉजिटिव सेंटिमेंट
घरेलू शेयर बाजारों में भी आज तेजी का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क सेंसेक्स (Sensex) 332.39 अंक चढ़कर 75,507.09 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी (Nifty) 84.60 अंक बढ़कर 23,747.40 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, बीते गुरुवार को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने ₹1,891.21 करोड़ के शेयर बेचे थे।
जोखिम और आगे का रास्ता
फिलहाल RBI के कदमों और कमोडिटी कीमतों में नरमी के चलते रुपये का शॉर्ट-टर्म आउटलुक (outlook) तो स्थिर नजर आ रहा है, लेकिन कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। भू-राजनीतिक तनाव करेंसी मार्केट के लिए एक बड़ा कंसर्न (concern) है। डॉलर के मुकाबले 94.80 के स्तर से नीचे का एक मजबूत ब्रेक रुपये में बड़े ट्रेंड रिवर्सल (trend reversal) का संकेत दे सकता है। सरकार पर मौजूदा करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) और ट्रेड डेफिसिट (trade deficit) को मैनेज करने के लिए रणनीतियाँ बनाने का दबाव है, जो भविष्य में चुनौतियां पेश कर सकती हैं। RBI स्वैप या लगातार कैपिटल इनफ्लो (capital inflows) जैसे अतिरिक्त सपोर्ट के बिना, रुपया डॉलर के मुकाबले धीरे-धीरे 97.00 के स्तर की ओर कमजोर हो सकता है।
