भारतीय रुपया धड़ाम! तेल के दाम और अमेरिका-ईरान तनाव का असर, डॉलर हावी

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारतीय रुपया धड़ाम! तेल के दाम और अमेरिका-ईरान तनाव का असर, डॉलर हावी
Overview

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मिले-जुले संकेतों के बीच भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले ₹94.25 के स्तर पर सपाट कारोबार कर रहा है। निवेशकों की नजरें ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों में जारी उथल-पुथल और अमेरिका व ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर बनी हुई हैं। पिछले हफ्ते ही रुपये ने **3 सालों** से अधिक समय में अपना सबसे खराब प्रदर्शन देखा था, जो इसकी कमजोरी को दर्शाता है।

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वैश्विक तनाव का बढ़ता दबाव

शुक्रवार, 27 अप्रैल को भारतीय रुपया एक स्थिर चाल में रहा, क्योंकि ट्रेडर्स 'वेट-एंड-सी' (wait-and-see) मोड में थे। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में आई रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से ट्रेडर्स पीछे हट गए। यह गतिरोध न केवल तेल की सप्लाई को प्रभावित करता है, बल्कि रुपये की स्थिरता पर भी गहरा असर डालता है।

पिछला हफ्ता रुपये के लिए बेहद खराब रहा, जो 1 फीसदी की गिरावट के साथ समाप्त हुआ। यह 3 सालों से ज्यादा समय में इसकी सबसे तेज गिरावट थी, जो इसकी मौजूदा कमजोरी की ओर इशारा करती है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के एनालिस्ट्स का कहना है कि 'रुपया और भी गिर सकता है क्योंकि डॉलर खरीदार एक्टिव हैं, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की गिरावट को मैनेज कर रहा है'। उम्मीदों पर तब और पानी फिर गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कथित तौर पर एक दूत की इस्लामाबाद की यात्रा रद्द कर दी, भले ही ईरान के विदेश मंत्री पाकिस्तान में थे।

शिपिंग के अहम रूट पर मंडराता खतरा

दबाव को और बढ़ाते हुए, हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जो वैश्विक ऊर्जा परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, व्यवधानों का सामना कर रहा है। अमेरिका और ईरान दोनों इस स्थिति का सामरिक लाभ उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे तेल की सप्लाई में अनिश्चितता पैदा हो गई है। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जाने के साथ, रुपये पर और गिरने का नया जोखिम मंडरा रहा है। इंपोर्टर्स (Importers) करेंसी में बड़ी गिरावट से संभावित नुकसान से बचने के लिए अपनी पोजीशन को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

इकोनॉमिक चिंताओं के बीच आरबीआई की सक्रियता

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डॉलर बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए वापस आ गया है, हालांकि ट्रेडर्स इन कदमों को सावधानीपूर्वक प्रबंधित मानते हैं। तेल की ऊंची कीमतों से भारत की इंपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे ग्रोथ धीमी हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। इस परिदृश्य में फिस्कल (fiscal) और करंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit) के और बढ़ने की भी उम्मीद है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के एनालिस्ट्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और रियल ट्रेड-वेटेड बेस पर रुपये के वर्तमान अंडरवैल्यूएशन (undervaluation) को नोट किया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है, "जब तक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा बनी रहेगी, तब तक हमारा मानना ​​है कि नकारात्मक पक्ष सकारात्मक से ज्यादा भारी पड़ेगा।"

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.