Indian Rupee: डॉलर के मुकाबले ₹95 के करीब फिसला, Sun Pharma डील और तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Rupee: डॉलर के मुकाबले ₹95 के करीब फिसला, Sun Pharma डील और तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
Overview

ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले संकेतों और घरेलू दबावों के चलते भारतीय रुपया (Indian Rupee) आज, **29 अप्रैल, 2026** को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग **₹95** के स्तर तक गिर गया। यह पिछले एक महीने का सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट की मुख्य वजहें Sun Pharmaceutical Industries की बड़ी डील, कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली रहीं।

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बड़ी डील और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दोहरा झटका

आज, 29 अप्रैल, 2026 को भारतीय रुपया (Indian Rupee) डॉलर के मुकाबले कमजोरी के साथ खुला, जो 94.74 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था और 95.22 के अपने हालिया निचले स्तर को छूने के करीब पहुंच गया। इस गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को हस्तक्षेप करना पड़ा। डॉलर की मांग में अचानक वृद्धि का एक बड़ा कारण Sun Pharmaceutical Industries द्वारा 27 अप्रैल, 2026 को की गई घोषणा है। कंपनी ने वैश्विक फर्म Organon & Co. को 11.75 अरब डॉलर में ऑल-कैश डील के तहत खरीदने का ऐलान किया है। इस बड़ी विदेशी खरीदारी के लिए भारी मात्रा में डॉलर की आवश्यकता होगी, जिससे बाजार से डॉलर बाहर जाएंगे। स्थिति तब और बिगड़ गई जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयरों में बिकवाली जारी रखी। 28 अप्रैल, 2026 तक, FIIs ने एक ही सत्र में ₹2,103.74 करोड़ के शेयर बेचे थे, और अकेले अप्रैल महीने में यह बिकवाली लगभग ₹58,000 करोड़ के पार पहुंच चुकी थी। यह दोहरा दबाव रुपये पर भारी पड़ रहा है।

तेल की कीमतों का बोझ और धीमी पड़ती आर्थिक रफ्तार

इस सबके बीच, कच्चे तेल (Crude Oil) की ऊंची कीमतें भी रुपये पर दबाव डाल रही हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फ्यूचर्स 111 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 99 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। यह मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता का संकेत है, खासकर जब अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा मार्गों में बाधा आ रही है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, जो एक बड़ा तेल आयातक देश है। तेल की ऊंची कीमतें मतलब आयात के लिए अधिक डॉलर की जरूरत। इस स्थिति को भारत की औद्योगिक गतिविधियों में आ रही मंदी ने और खराब कर दिया है। मार्च 2026 में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) में केवल 4.1% की वृद्धि दर्ज की गई, जो फरवरी के 5.2% से कम है और पिछले पांच महीनों का सबसे निचला स्तर है। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग क्षेत्र में मजबूती दिखी, लेकिन बिजली उत्पादन में भारी गिरावट ने विकास दर को खींचा। यह बताता है कि बढ़ती लागतें और आर्थिक अनिश्चितता वास्तविक आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही है।

रुपये की संरचनात्मक चिंताएं और विश्लेषकों का नज़रिया

भारतीय रुपया 2025 से ही एशियाई मुद्राओं के मुकाबले कमजोर रहा है और 2026 में भी इस दबाव का सामना कर रहा है। कुछ विश्लेषकों को उम्मीद है कि यदि व्यापारिक तनाव कम होता है और तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो 2026 के अंत तक रुपया ₹86 तक मजबूत हो सकता है। वहीं, कुछ अन्य लगातार उतार-चढ़ाव की भविष्यवाणी कर रहे हैं। MUFG रिसर्च का अनुमान है कि रुपये के लगातार कमजोर प्रदर्शन को देखते हुए 2026 की तीसरी तिमाही तक USD/INR 92.00 के आसपास रहेगा, जबकि कैम्ब्रिज करंसीज़ (Cambridge Currencies) ₹91-93 की उम्मीद कर रहे हैं। RBI का खुद का अनुमान, जो फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए USD/INR 94 रहने का है, इन चुनौतियों को दर्शाता है। ऐतिहासिक रूप से, तेल की कीमतों में उछाल से रुपये में गिरावट आई है, जैसा कि 2013 और 2018 में देखा गया था। रुपया मार्च 2026 के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 99.82 के करीब पहुंच रहा है। RBI ने पहले भी हस्तक्षेप किया है, जैसे 2026 की शुरुआत में किए गए उपायों से कुछ समय के लिए इंट्राडे मजबूती मिली थी। हालांकि, वर्तमान दबाव कई कारणों का मिलाजुला असर है। मजबूत आर्थिक विकास और घरेलू मांग के बावजूद, रुपये में संरचनात्मक कमजोरियां हैं। FIIs की निरंतर बिकवाली एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि कहा जा रहा है कि FDI इनफ्लो धीमा पड़ गया है। Sun Pharma की बड़ी डील ऐसे नाजुक समय में डॉलर निकाल रही है, जो असंतुलन को और खराब कर सकती है। भू-राजनीतिक संकट तेल की कीमतों पर लगातार जोखिम बना रहा है, जिससे उच्च आयात लागत के जरिए भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है। इन वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के संयुक्त दबाव के सामने RBI की हस्तक्षेप करने की क्षमता पर भारी दबाव है। पिछले आक्रामक हस्तक्षेपों से पता चलता है कि आधिकारिक कार्रवाइयां मजबूत बाजार ताकतों के खिलाफ केवल अल्पकालिक राहत दे सकती हैं। चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) ऊर्जा मूल्य के उतार-चढ़ाव से होने वाले झटकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। 2026 के बाकी हिस्सों में रुपये की दिशा के बारे में विश्लेषकों के विचार मिश्रित हैं, अनुमान 86-88 तक मजबूती से लेकर, 91-93 के आधार मामले (base case) तक, या 94-95 तक कमजोरी तक हैं। CoinCodex का अनुमान है कि 2026 के अंत तक USD/INR 105.84 तक जा सकता है। RBI का FY2026-27 के लिए 94 का अनुमान, निरंतर मुद्रा प्रबंधन चुनौतियों का संकेत देता है। देखने वाली मुख्य बातें US फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा-निर्देश और मध्य पूर्व की बदलती स्थिति होंगी, जो डॉलर की मजबूती और तेल की कीमतों को प्रभावित करेंगी।

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