Indian Rupee Price: डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Rupee Price: डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट

भारतीय रुपये (Indian Rupee) ने हफ्ते की शुरुआत मजबूती के साथ की है। सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया **28 पैसे** चढ़कर **96.25** पर खुला। कच्चे तेल की कीमतों में **4.17%** की भारी गिरावट और डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने से रुपये को सहारा मिला है।

Detailed Coverage

क्यों मजबूत हुआ रुपया?

सोमवार को रुपया 96.25 के स्तर पर खुला, जो पिछले बंद भाव से 28 पैसे की मजबूती दर्शाता है। इस उछाल का मुख्य कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में आई बड़ी गिरावट है। भारत का सबसे बड़ा आयात बिल कच्चे तेल का ही होता है, और इसकी कीमतों में आई कमी से आयात लागत कम होती है। सोमवार को क्रूड ऑयल $92.74 प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। माना जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से ऑयल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

ग्लोबल फैक्टर का असर

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार की चाल भी रुपये के लिए मददगार साबित हुई। यूएस डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापता है, 0.26% गिरकर 101.04 पर आ गया। जब डॉलर वैश्विक स्तर पर कमजोर होता है, तो अक्सर उभरते बाज़ारों की मुद्राओं को राहत मिलती है। इसके अलावा, भारतीय शेयर बाज़ारों में भी तेजी का माहौल रहा, जिसने घरेलू मुद्रा को और मजबूती दी। BSE सेंसेक्स 613.80 अंक चढ़कर 76,673.57 पर और NSE निफ्टी 165.40 अंक बढ़कर 23,931.55 पर बंद हुआ।

FII बिकवाली पर नज़र

हालांकि, सोमवार को रुपये में मजबूती देखने को मिली, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सिलसिला जारी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने पिछले कारोबारी सत्र में ₹3,892.77 करोड़ के शेयर बेचे थे। विदेशी पूंजी का लगातार बाहर जाना, कच्चे तेल की कीमतों में आई अस्थायी राहत के बावजूद, रुपये पर दबाव डाल सकता है।

निवेशकों के लिए, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और FIIs की बिकवाली का रुख कैसे बदलता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो भारत के ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को कम करने में मदद मिलेगी। लेकिन रुपये की मौजूदा मजबूती कितनी टिकाऊ होगी, यह आने वाले सत्रों में विदेशी निवेश के प्रवाह और तेल बाज़ार की चाल पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.