पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और कच्चे तेल की कीमतों के $120 प्रति बैरल के करीब पहुंचने के कारण सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92.33 पर बंद हुआ। यह गिरावट भारत की 90% से अधिक आयात पर निर्भरता को उजागर करती है, जो कच्चे तेल का एक प्रमुख उपभोक्ता है।
वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल, जो मध्य-2022 के बाद का उच्चतम स्तर है, सीधे तौर पर रुपये पर दबाव डाल रहा है। शुक्रवार को 91.75 पर बंद होने वाले रुपये ने अस्थिर ट्रेडिंग के बीच दिन के दौरान 92.35 का निम्नतम स्तर भी छुआ। इस स्थिति को निवेशकों के सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ने (flight to safety) और भारत जैसे उभरते बाजारों से पूंजी के बहिर्वाह (capital outflows) के साथ-साथ मजबूत हो रहे अमेरिकी डॉलर ने और गंभीर बना दिया है, जिससे डॉलर-आधारित आयात (dollar-denominated imports) का बोझ बढ़ गया है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि कच्चे तेल की प्रत्येक $1 की वृद्धि से भारत के वार्षिक आयात बिल में लगभग $1.8 बिलियन का इजाफा होता है। वहीं, यदि कच्चे तेल की कीमतों में $50 का उछाल आता है, तो देश को लगभग $90 बिलियन का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है, जो उसकी जीडीपी का 2% से भी अधिक है। इस भारी आयात निर्भरता के कारण भारत के चालू खाता घाटे (current account deficit) में बढ़ोतरी, विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) पर दबाव और आयातित वस्तुओं से जुड़ी महंगाई (inflation) की चिंताएं बढ़ जाती हैं।
रुपया, एशिया की कई कमजोर मुद्राओं में से एक बन गया है, कुछ विश्लेषकों ने तो इसे 2025 में क्षेत्र का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला करार दिया है। हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण अन्य एशियाई मुद्राएं भी कमजोर हुई हैं, लेकिन भारत की उच्च आयात निर्भरता इसे विशेष रूप से कमजोर बनाती है। ऐतिहासिक रूप से, संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में तेज वृद्धि ने भारत में महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और बाजार में बड़ी गिरावट को जन्म दिया है। मौजूदा स्थिति बाजार के ऊंचे मूल्यांकन (elevated market valuations) से और जटिल हो गई है; निफ्टी 50 का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 21-22x है, जो मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के प्रति संवेदनशीलता का संकेत देता है। दिसंबर 2025 तक भारत के कुल शेयर बाजार पूंजीकरण (stock market capitalization) का 137.7% रहा।