RBI पॉलिसी से पहले रुपया संभला, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें दे रही टेंशन!

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI पॉलिसी से पहले रुपया संभला, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें दे रही टेंशन!
Overview

RBI की एक अहम समय सीमा से पहले बैंकों द्वारा अपने ऑफशोर पोजीशन को कम करने के चलते, भारतीय रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **6 पैसे** मजबूत होकर **93** के करीब कारोबार कर रहा है। हालांकि, बाज़ारें आने वाली RBI की पॉलिसी मीटिंग और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर पैनी नज़र रखे हुए हैं, जो तेल की कीमतों और करेंसी की स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

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RBI डेडलाइन से पहले बैंकों की पोजीशन में बदलाव

RBI के एक निर्देश के बाद, बैंकों ने अपने ऑफशोर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) पोजीशन को कम करना शुरू कर दिया है। इस दिशा-निर्देश का पालन 10 अप्रैल तक किया जाना है, जिसका उद्देश्य सट्टेबाजी के दबाव को कम करना है। पिछले हफ्ते की उठापटक के बाद, रुपया अब कुछ हद तक स्थिर हुआ है और एक सीमित दायरे में बना हुआ है।

बाज़ार RBI की पॉलिसी का कर रहा इंतज़ार

अब सभी की निगाहें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की पहली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग पर हैं, जो इस फाइनेंशियल ईयर की 8 अप्रैल को होनी है। ज़्यादातर जानकारों का मानना है कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन निवेशक सेंट्रल बैंक की लिक्विडिटी, महंगाई के अनुमान और आर्थिक विकास पर टिप्पणियों पर बारीकी से नज़र रखेंगे। पॉलिसी से जुड़े किसी भी संकेत का बाज़ार की चाल पर गहरा असर पड़ेगा।

पश्चिम एशिया के तनाव से तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा

वहीं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से बाहरी दबाव बढ़ रहा है। 8 अप्रैल की एक अहम समय सीमा नज़दीक आ रही है, जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों को न निकलने देने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। यह स्ट्रेट तेल शिपिंग का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। स्थिति को शांत करने के प्रयास अब तक नाकाम रहे हैं, जिससे संभावित सप्लाई में रुकावटों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

कच्चे तेल में उछाल से महंगाई की चिंताएं बढ़ीं

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें फरवरी के अंत से करीब 50% उछलकर लगभग $111 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। यह बढ़ोतरी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी 85% से ज़्यादा तेल की ज़रूरतें आयात करके पूरा करता है। तेल की बढ़ती कीमतों का मतलब है कि भारत को आयात बिल चुकाने के लिए ज़्यादा डॉलर की ज़रूरत होगी, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा, करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है और महंगाई को भी पंख लग सकते हैं।

विश्लेषकों को दिख रही सीमित दायरे में चाल

विश्लेषकों का अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया एक सीमित दायरे में ही कारोबार करेगा। Finrex Treasury Advisors के विश्लेषकों का कहना है, 'बाज़ार RBI के पॉलिसी रिव्यू, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और बैंकों के आर्बिट्रेज पोजीशन को खत्म करने की समय सीमा का इंतज़ार कर रहा है।' उनका अनुमान है कि रुपया 92.50 और 93.50 के बीच उतार-चढ़ाव दिखा सकता है। रुपये की आगे की दिशा घरेलू नीतिगत संकेतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक और तेल बाज़ार के बदलावों पर निर्भर करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.