मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **6 पैसे** कमजोर होकर **₹96.42** पर खुला। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और सुरक्षित निवेश की तलाश में डॉलर की बढ़ी मांग इस गिरावट की मुख्य वजहें हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का घरेलू शेयर बाजार पर असर भी निवेशकों पर नजर रख रहे हैं।
Detailed Coverage
क्यों दबाव में है रुपया?
वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनावों के चलते निवेशकों की सतर्कता बढ़ी हुई है। इसी बीच, पश्चिम एशिया में बढ़ी हुई अशांति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ाती हैं, जो रुपये पर दबाव डालती हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $88.64 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, और तेल आपूर्ति में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।
इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक को ट्रैक करता है, 100.97 तक बढ़ गया है। भू-राजनीतिक संघर्षों के इस दौर में निवेशक स्थिरता की तलाश में हैं, जिससे डॉलर को एक सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Asset) के तौर पर फायदा मिल रहा है।
शेयर बाजार पर असर?
इन बाहरी दबावों का सीधा असर घरेलू शेयर बाजारों पर भी दिख रहा है। सेंसेक्स 59 अंकों की गिरावट के साथ 77,649.63 पर और निफ्टी 24,216.05 के स्तर पर खुला। बाजार के लिए एक बड़ी चिंता विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की हालिया बिकवाली है। सोमवार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने ₹1,121.04 करोड़ की इक्विटी बेची है। लगातार हो रही यह बिकवाली स्थानीय बाजार में लिक्विडिटी को कम कर सकती है और शेयर की कीमतों के साथ-साथ रुपये की गिरावट को और बढ़ा सकती है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। विशेष रूप से तेल उत्पादक क्षेत्रों से जुड़े किसी भी भू-राजनीतिक संघर्ष में वृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला की चिंताओं को बढ़ा सकती है और रुपये को और कमजोर कर सकती है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों के दैनिक निवेश डेटा पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि बिकवाली का यह दौर जारी रहा तो बाजार की धारणा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। फिलहाल, रुपया डॉलर के मुकाबले किस स्तर पर स्थिर होगा, यह आने वाले सत्रों में इन भू-राजनीतिक और कमोडिटी कीमतों के जोखिमों पर निर्भर करेगा।
