भारतीय रुपया आज यानी सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **18 पैसे** कमजोर होकर **₹95.40** के तीन हफ्तों के निचले स्तर पर आ गया। डॉलर इंडेक्स में मजबूती और भारतीय कंपनियों की लगातार डॉलर मांग के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है, भले ही कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हों।
डॉलर के आगे झुका रुपया
आज शेयर बाजार में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के सामने घुटने टेक दिए। रुपया 18 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ ₹95.40 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले तीन हफ़्तों का सबसे निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापता है, 0.26% बढ़कर 101.12 पर पहुँच गया।
वैश्विक असर और कच्चे तेल का खेल
पिछले एक महीने में डॉलर इंडेक्स लगभग 2% मजबूत हुआ है, जिसका सीधा असर रुपये जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि निवेशक डॉलर-आधारित संपत्तियों में पैसा लगाना पसंद करते हैं।
हालांकि, भारत के लिए एक अच्छी खबर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। पिछले महीने तेल के दाम 26% गिरे हैं और वर्तमान में यह $71 प्रति बैरल के आसपास है। आमतौर पर, कम तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत लाती हैं, लेकिन इस बार यह राहत रुपये को गिरने से नहीं रोक पाई। घरेलू तेल कंपनियों की लगातार डॉलर मांग ने रुपये पर दबाव बनाए रखा।
RBI की दखल और आगे की राह
बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बाजार में डॉलर बेचे हैं। इसके बावजूद, रुपया एकतरफा डॉलर इंडेक्स की चाल से प्रभावित हो रहा है। बाजार की मंशा सतर्क दिख रही है, क्योंकि रुपया स्थानीय आर्थिक संकेतकों के बजाय वैश्विक डॉलर के रुझानों से जुड़ा हुआ है।
आगे चलकर, डॉलर इंडेक्स की चाल ही रुपये के लिए सबसे अहम रहेगी। विश्लेषकों का अनुमान है कि नज़दीकी भविष्य में रुपया 94.45 से 95.80 के बीच कारोबार कर सकता है। अगर डॉलर इंडेक्स लगातार बढ़ता रहा, तो रुपया 95.80 से 96.00 के स्तर तक जा सकता है। फिलहाल, 96 के स्तर से नीचे स्थिरता बनाए रखना रुपये के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
