Indian Passport Ranking: भारत की बड़ी गिरावट, अब 125वें पायदान पर

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Passport Ranking: भारत की बड़ी गिरावट, अब 125वें पायदान पर

साल 2026 के ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स में भारत की रैंकिंग फिसलकर 125वें स्थान पर आ गई है। अब भारतीय पासपोर्ट धारक केवल 26 देशों में ही वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय व्यापार यात्रा और पर्यटन के लिए चिंता का विषय है।

क्या हुआ?

साल 2026 के ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स में भारत की वैश्विक यात्रा गतिशीलता (Global Travel Mobility) रैंकिंग फिसलकर 125वें स्थान पर पहुँच गई है। पिछले साल भारत 124वें स्थान पर था। वर्तमान में, भारतीय पासपोर्ट धारकों को दुनिया भर में केवल 26 गंतव्यों के लिए वीज़ा-फ्री (visa-free) या वीज़ा-ऑन-अराइवल (visa-on-arrival) की सुविधा मिलती है। अमेरिका, यूके, चीन, जर्मनी, फ्रांस और यूएई जैसे प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में जाने के लिए भारतीय यात्रियों को अभी भी यात्रा से पहले वीज़ा प्राप्त करना पड़ता है।

व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा पर असर

इस निचली रैंकिंग का भारतीय पेशेवरों, व्यापारिक यात्रियों और पर्यटकों पर सीधा असर पड़ेगा। प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक सीमित पहुँच का मतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार यात्राओं के लिए अक्सर लंबी वीज़ा आवेदन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे यात्रा लागत बढ़ सकती है और योजना में देरी हो सकती है। नेपाल, भूटान और जमैका जैसे देशों की यात्रा तो आसान बनी हुई है, लेकिन शीर्ष वैश्विक बाजारों में निर्बाध प्रवेश की कमी व्यक्तियों और कंपनियों के लिए एक बाधा बनी हुई है।

क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ

अन्य देशों की तुलना में, भारत की रैंकिंग यात्रा की स्वतंत्रता में एक बड़ी खाई को उजागर करती है। जहाँ चीन 104वें स्थान पर है, वहीं अन्य दक्षिण एशियाई पड़ोसियों की स्थिति और भी गंभीर है - नेपाल 164वें, बांग्लादेश 166वें और पाकिस्तान 188वें स्थान पर हैं। इसके विपरीत, यूरोपीय देश इंडेक्स में शीर्ष पर हैं। स्वीडन, स्विट्जरलैंड और फिनलैंड जैसे देश अनुकूल पारस्परिक यात्रा समझौतों के कारण लगातार शीर्ष पर बने हुए हैं। अमेरिका और फ्रांस जैसे बड़े देश वर्तमान में 11वें स्थान पर हैं, जबकि कनाडा 13वें स्थान पर है। यह दर्शाता है कि विभिन्न देश सीमा पार आवाजाही को कैसे प्रबंधित करते हैं, इसमें एक पदानुक्रम (hierarchy) मौजूद है।

ऐतिहासिक रुझान और सीमाएँ

पिछले कुछ वर्षों में भारत की पासपोर्ट शक्ति में उतार-चढ़ाव देखा गया है। हालाँकि 2021 से 2023 के बीच 127वीं रैंकिंग से थोड़ी सुधार हुआ था, लेकिन अब 125वीं रैंक पर पहुँचना यह दर्शाता है कि वीज़ा-फ्री पहुँच का विस्तार करने के प्रयास अन्य देशों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाए हैं। निवेशक और व्यवसाय अक्सर इन यात्रा गतिशीलता मेट्रिक्स को राजनयिक संबंधों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करने में आसानी के प्रॉक्सी (proxy) के रूप में ट्रैक करते हैं, क्योंकि सीमित गतिशीलता कभी-कभी व्यवसाय विस्तार और प्रतिभा आवाजाही के लिए उच्च प्रशासनिक बाधाओं से जुड़ी हो सकती है।

निवेशकों और यात्रियों को क्या देखना चाहिए

व्यापक आर्थिक निहितार्थों (economic implications) पर नज़र रखने वालों के लिए, मुख्य बात वीज़ा पारस्परिकता (visa reciprocity) के संबंध में राजनयिक समझौतों में किसी भी बदलाव पर नज़र रखना है। रैंकिंग में भविष्य में सुधार मुख्य रूप से सरकार द्वारा प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ यात्रा आवश्यकताओं को सरल बनाने के उद्देश्य से किए गए द्विपक्षीय वार्ता (bilateral talks) पर निर्भर करेगा। इन नीतियों में बदलाव सीधे तौर पर भारतीय फर्मों के वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (global supply chains) में एकीकृत होने और अपने अंतर्राष्ट्रीय परिचालन का विस्तार करने की आसानी को प्रभावित कर सकते हैं।

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