मई 2026 में भारतीय निवासियों ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश में **$2.39 बिलियन** भेजे, जो पिछले साल की तुलना में **3.6%** अधिक है। कुल खर्च में वृद्धि के बावजूद, विदेशी इक्विटी और डेट निवेश की मांग बढ़ी है, वहीं विदेश यात्रा और शिक्षा पर खर्च में कमी आई है।
Detailed Coverage
RBI के आंकड़े क्या कहते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत कुल विदेश भेजे गए पैसे $2.39 बिलियन रहे। यह पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 3.6% की वृद्धि दर्शाता है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण भारतीयों द्वारा अपनी विदेशी संपत्ति के आवंटन में आया बदलाव है, जिसमें वित्तीय निवेश की ओर स्पष्ट झुकाव दिख रहा है।
विदेशी वित्तीय संपत्तियों की ओर रुझान
मई के आंकड़ों में सबसे खास बात यह है कि भारतीय निवेशक किस तरह से ग्लोबल एक्सपोजर की तलाश कर रहे हैं। विशेष रूप से इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स (शेयरों और बॉन्ड) की खरीद के लिए भेजे गए पैसे लगभग दोगुने होकर $363.6 मिलियन हो गए। इसके अलावा, विदेशी बैंक खातों में जमा (डिपॉजिट) के लिए भेजी गई राशि भी दोगुनी से अधिक होकर $118.12 मिलियन तक पहुंच गई। यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे ग्लोबल मार्केट और ब्याज दरों का माहौल बदल रहा है, भारतीय निवेशक सक्रिय रूप से देश के बाहर संपत्ति में निवेश कर रहे हैं।
यात्रा और शिक्षा पर खर्च में गिरावट
जहां एक ओर निवेश में तेजी देखी गई, वहीं दूसरी ओर LRS के तहत खर्च होने वाली अन्य प्रमुख मदों में नरमी के संकेत मिले। कुल रेमिटेंस में यात्रा का हिस्सा सबसे बड़ा रहा, लेकिन यह पिछले साल की तुलना में 7.7% घटकर $1.28 बिलियन रह गया। इसी तरह, विदेश में शिक्षा पर होने वाला खर्च भी काफी कम हुआ, जो 38% की गिरावट के साथ $92.61 मिलियन पर आ गया। उपहार (गिफ्ट) के तौर पर भेजे गए पैसों में 13.6% की कमी आई और यह $201.5 मिलियन रहा, वहीं विदेशी रियल एस्टेट में निवेश 14.22% घटकर $35.76 मिलियन हो गया।
व्यापक तस्वीर
इस फाइनेंशियल ईयर के अप्रैल-मई की अवधि को देखें तो तस्वीर मिली-जुली है। इन दो महीनों में कुल खर्च पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 2.33% घटकर $4.68 बिलियन हो गया। इस सामूहिक गिरावट का मुख्य कारण यात्रा और शिक्षा पर कम हुआ खर्च है, जो पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा था।
निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण है कि किस प्रकार के खर्च में कितना अंतर आ रहा है। जमा और इक्विटी से संबंधित रेमिटेंस में मजबूत वृद्धि अंतरराष्ट्रीय संपत्ति विविधीकरण (diversification) की बढ़ती भूख को दर्शाती है, भले ही यात्रा और विदेशी शिक्षा सेवाओं की मांग पर दबाव बना हुआ है। निवेशक यह भी देख सकते हैं कि क्या वैश्विक वित्तीय संपत्तियों को तरजीह देने का यह रुझान पूरे वित्तीय वर्ष में जारी रहता है, जो वैश्विक बनाम स्थानीय संपत्ति के प्रदर्शन के संबंध में घरेलू निवेशक की भावना का एक संकेतक होगा।
