जून 2026 में भारत का विदेशी निवेश 40% गिरा, ₹2.99 अरब पर पहुंचा

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AuthorNeha Patil|Published at:
जून 2026 में भारत का विदेशी निवेश 40% गिरा, ₹2.99 अरब पर पहुंचा

जून 2026 में भारतीय कंपनियों की विदेशी निवेश प्रतिबद्धता घटकर **$2.99 अरब** रह गई, जो पिछले साल की तुलना में **40.55%** की गिरावट दर्शाती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनियों की रणनीति में बदलाव आया है, जिसमें कंस्ट्रक्शन सेक्टर प्रमुख बनकर उभरा है और सिंगापुर एक बार फिर निवेश का सबसे बड़ा डेस्टिनेशन बन गया है।

विदेशी निवेश में बड़ी गिरावट

जून 2026 में भारतीय कंपनियों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रतिबद्धता घटकर $2.99 अरब रह गई है। यह पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 40.55% की भारी गिरावट है। इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनियों द्वारा फंड के इस्तेमाल के सेक्टर और उनके द्वारा चुने गए भौगोलिक स्थानों में आया बड़ा बदलाव है।

कंस्ट्रक्शन बना नया फोकस

लंबे समय से, वित्तीय, बीमा और व्यावसायिक सेवाएं भारतीय विदेशी निवेश के प्रमुख चालक रहे हैं। हालांकि, जून के आंकड़ों में इस क्षेत्र में भारी कमी देखी गई है, और अब यह कुल प्रतिबद्धताओं का 20% से भी कम है। एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में, कंस्ट्रक्शन सेक्टर का हिस्सा जून में बढ़कर 25.68% हो गया, जो पिछले महीने सिर्फ 5.17% था। यह दर्शाता है कि बड़ी भारतीय कंपनियां सिर्फ वित्तीय या सेवा-आधारित विस्तार के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की ओर अपनी ग्लोबल स्ट्रेटेजी को फिर से केंद्रित कर सकती हैं।

सिंगापुर बना पसंदीदा डेस्टिनेशन

इस महीने में भौगोलिक पसंद में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। सिंगापुर ने भारतीय पूंजी के लिए टॉप डेस्टिनेशन के रूप में अपनी जगह वापस पा ली है, जिसने कुल निवेश का 23.79% हिस्सा हासिल किया। मई में सिंगापुर का हिस्सा 8.59% था, जो एक बड़ी छलांग है। वहीं, मॉरीशस, जो मई में एक प्रमुख डेस्टिनेशन था, जून में उसका हिस्सा घटकर 1.08% रह गया। ये उतार-चढ़ाव अक्सर टैक्स प्लानिंग, बिजनेस हब और कंपनियों के ग्लोबल सप्लाई चेन को री-अलाइन करने के प्रयासों को दर्शाते हैं।

लंबी अवधि के रुझान को समझना

हालांकि जून की 40% की गिरावट काफी ज्यादा लगती है, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड लगातार ग्रोथ दिखाता है। फाइनेंशियल ईयर 2015-16 के बाद से, भारत से कुल विदेशी FDI में लगभग 50% की वृद्धि हुई है, जो फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक $46.86 अरब तक पहुंच गया था। यह बताता है कि मासिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारतीय कॉर्पोरेशन्स वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जून में आई गिरावट ने विशेष रूप से इक्विटी, डेट और कॉर्पोरेट गारंटी में की गई प्रतिबद्धताओं को प्रभावित किया। निवेशकों के लिए, ये आंकड़े इस बात का आईना हैं कि कैसे भारतीय व्यवसाय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। आगे चलकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंस्ट्रक्शन से जुड़े निवेशों में वृद्धि जारी रहती है या कंपनियां आने वाली तिमाहियों में सेवा-आधारित विदेशी विस्तार की ओर लौटती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.