पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आग लगने के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट देखी गई। Brent Crude $111 प्रति बैरल के पार पहुँच गया, जिससे इंपोर्टेड महंगाई (Imported Inflation) का डर बढ़ गया है।
इस तनावपूर्ण माहौल के चलते BSE Sensex 950 अंकों से ज़्यादा लुढ़क गया, जबकि Nifty 50 23,350 के स्तर के नीचे आ गया। इस बिकवाली (Sell-off) के कारण निवेशकों की ₹7.5 लाख करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ। इंडिया VIX (India VIX) भी 19.96 पर पहुँच गया, जो बाज़ार में बढ़ती घबराहट को दर्शाता है।
हालांकि, इस व्यापक बिकवाली के बीच IT सेक्टर ने सबको चौंका दिया। यह एकमात्र ऐसा प्रमुख सेक्टर रहा जिसने हरे निशान में क्लोजिंग दी, Nifty IT इंडेक्स में 0.45% की मामूली बढ़त दर्ज हुई। Infosys और Tech Mahindra जैसे शेयर Sensex के टॉप गेनर्स में शामिल रहे। IT कंपनियों की डॉलर में कमाई और उनकी सेवाओं की ग्लोबल डिमांड (Global Demand) ने इस सेक्टर को मज़बूती दी।
इसके विपरीत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर 2.49%, रियल एस्टेट 2.23% और PSU बैंक 2.03% तक गिर गए। बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव रहा, जिससे SBI और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े बैंक भी नीचे आए।
एनालिस्ट्स का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 27 की दूसरी छमाही तक रिटेल महंगाई 6-7% तक जा सकती है। कच्चे तेल की कीमतें $100 के ऊपर बने रहने से भारत की आर्थिक स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है। इससे GDP ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है, Crisil का अनुमान 6.6% और ADB का अनुमान 6.3% है। डॉलर के मुकाबले रुपया 96.15 के स्तर तक गिर गया, जिससे आयात महंगा हो गया। हालांकि, IT सेक्टर अपनी मज़बूत ग्लोबल डिमांड के कारण बाज़ार के लिए एक 'डिफेंसिव' (Defensive) विकल्प बना हुआ है। लेकिन, घरेलू मांग पर निर्भर सेक्टरों के लिए अनिश्चितता बनी हुई है, जो पश्चिम एशिया के संकट के समाधान पर निर्भर करेगा।