Indian Markets Surge: अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद से Sensex, Nifty में आई बहार!

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Markets Surge: अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद से Sensex, Nifty में आई बहार!
Overview

वैश्विक बाजारों से मिले राहत भरे संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में आज जोरदार तेजी देखी गई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट आई, जिससे BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में बड़ी बढ़त दर्ज की गई। साथ ही, यूनियन कैबिनेट द्वारा **₹18,100 करोड़** के इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी प्रोग्राम को मंजूरी मिलने से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा। हालांकि, निवेशक अभी भी महंगाई के जोखिमों और शेयरों की ऊंची कीमतों को लेकर सतर्क हैं।

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भू-राजनीतिक राहत से भारतीय बाजारों में आई रौनक

बुधवार को भारतीय शेयर बाजार वैश्विक बाजारों के साथ मिलकर रॉकेट की तरह भागा। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की उम्मीदों से कच्चा तेल (Crude Oil) सस्ता हो गया, जिसने भारत की आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत दी। इस भू-राजनीतिक राहत ने बाजार में व्यापक तेजी को हवा दी। BSE Sensex 941 अंक चढ़कर 77,959 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 298 अंक की बढ़त के साथ 24,331 पर पहुंच गया। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹6 लाख करोड़ बढ़कर ₹473 लाख करोड़ हो गया। हालांकि, यह तेजी शांति की उम्मीदों पर टिकी है, क्योंकि अंदरूनी आर्थिक दबाव और वैल्यूएशन की चिंताएं निवेशकों को सतर्क कर रही हैं।

अमेरिका-ईरान डी-एस्केलेशन से क्रूड ऑयल में बड़ी गिरावट

आज की इस बड़ी तेजी का मुख्य कारण यह खबर थी कि ईरान एक नई अमेरिकी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिससे शत्रुता समाप्त हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे हॉरमूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल सकता है और बंदरगाहों की नाकेबंदी हट सकती है। इसी के चलते Brent Crude Oil की कीमत 7% गिरकर $101.94 प्रति बैरल पर आ गई। इतिहास गवाह है कि ऐसे तनाव कम होने से बाजार में बड़ी गिरावट देखी जाती है, जैसे 2026 में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण Nifty 50 में लगभग 9% की गिरावट आई थी। फिलहाल, Nifty 50 के लिए 24,450-24,500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस (Resistance) है, जबकि 24,220-24,200 पर सपोर्ट (Support) है। Sensex फिलहाल 21.0 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, वहीं Nifty 50 का P/E 20.95 है, जो दर्शाता है कि बाजार न तो बहुत सस्ता है और न ही बहुत महंगा।

सरकारी स्कीमों से मिली आर्थिक मजबूती

घरेलू सेंटीमेंट को और बढ़ावा देते हुए, यूनियन कैबिनेट ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दी है, जिससे ₹2.55 लाख करोड़ के अतिरिक्त क्रेडिट फ्लो का लक्ष्य है। इस योजना का उद्देश्य MSMEs (छोटे और मध्यम उद्योग) के लिए 100% क्रेडिट गारंटी कवरेज और नॉन-MSMEs व एयरलाइन सेक्टर के लिए 90% कवरेज प्रदान करना है, जो भू-राजनीतिक तनावों से बढ़ी लिक्विडिटी की तंगी को दूर करेगा। यह ECLGS के पिछले संस्करणों पर आधारित है, जो महामारी के दौरान व्यवसायों को सहारा देने में महत्वपूर्ण थे।

बैंकों के मार्जिन पर दबाव का जोखिम

बैंकिंग सेक्टर, जिसने HDFC Bank और ICICI Bank के नेतृत्व में रैली में महत्वपूर्ण योगदान दिया, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) देख रहा है। भारत के बैंकिंग सेक्टर ने FY26 के लिए 15.9% की ईयर-ऑन-ईयर क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की, जो मजबूत आर्थिक विस्तार और पूंजीगत व्यय चक्र की ओर बदलाव का संकेत है। HDFC Bank, जो अपने 5-साल के औसत से नीचे लगभग 2.5x के P/B रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, आकर्षक वैल्यूएशन (Valuation) पेश कर रहा है। ICICI Bank, 83 के GF स्कोर के साथ, मामूली रूप से अंडरवैल्यूड (Undervalued) माना जा रहा है। हालांकि, Fitch Ratings ने तंग लिक्विडिटी (Liquidity) और रुपये की अस्थिरता के कारण भारतीय बैंकों के मार्जिन पर बढ़ते दबाव की चेतावनी दी है। यदि उच्च फंडिंग लागत बनी रहती है, तो सेक्टर का मार्जिन अनुमानित 3.1% (FY27 के लिए) से 20-30 बेसिस पॉइंट तक गिर सकता है। लोन ग्रोथ की तुलना में डिपॉजिट ग्रोथ धीमी रहने से जमा राशि के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, जिससे पॉलिसी रेट कट का ट्रांसमिशन (Transmission) जटिल हो रहा है।

महंगाई अभी भी एक बड़ी चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद, महंगाई (Inflation) एक बड़ी चिंता बनी हुई है। मार्च 2026 में भारत की CPI महंगाई 3.4% थी, और FY27 के लिए इसके 4.6% से 5.1% के बीच रहने का अनुमान है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऊर्जा की कीमतों में जोखिम और अल नीनो (El Niño) की स्थिति से खाद्य कीमतों पर असर पड़ने की आशंका के कारण कमोडिटी की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।

उभरते बाजारों के लिए वैश्विक रुझान अनुकूल

विकसित बाजारों में मजबूत AI-संचालित टेक कमाई और डॉलर में कमजोरी के कारण, वैश्विक सेंटीमेंट जोखिम-पर (Risk-on) अप्रोच की ओर बढ़ रहा है, जो उभरते बाजारों (Emerging Markets) में निवेश के प्रवाह को लाभ पहुंचाता है। भारत, एक महत्वपूर्ण उभरता बाजार होने के नाते, इस व्यापक प्रवृत्ति से लाभान्वित हो रहा है, हालांकि इसकी अपनी विशिष्ट कमजोरियां बनी हुई हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.