वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजारों में आज नरमी का रुझान देखने को मिल सकता है।...
बाजार की चाल
वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण आज भारतीय शेयर बाजारों में नरमी रहने की उम्मीद है। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) भी घरेलू इक्विटी के लिए एक कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है।
कच्चे तेल का बढ़ता दाम
ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी की घोषणा ने भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में 2% का उछाल आया है। ऐतिहासिक रूप से, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित होती हैं, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऊर्जा लागत में लगातार वृद्धि से विमानन (Aviation), पेंट (Paints) और रसायन (Chemicals) जैसे क्षेत्रों की कंपनियों के लाभ मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है, साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए मुद्रास्फीति (Inflation) का अनुमान लगाना भी मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिकी शेयर बाजारों का असर
अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में आई गिरावट ने भी वैश्विक सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। पिछले सत्र में Nasdaq Composite 1.41% लुढ़क गया था। निवेशक अब अमेरिकी मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़ों पर कड़ी नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह जानकारी अक्सर वैश्विक ब्याज दर की उम्मीदों और विदेशी पूंजी प्रवाह की दिशा को प्रभावित करती है। घरेलू बाजार में, डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yields) की चाल महत्वपूर्ण कारक होंगे, क्योंकि ये उभरते बाजारों की संपत्तियों (Emerging Market Assets) को प्रभावित करते हैं।
FIIs और DIIs की भूमिका
हाल के सत्रों में संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की गतिविधि में भिन्नता देखी गई है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) 13 जुलाई को ₹3,000 करोड़ से अधिक की इक्विटी बेचकर शुद्ध बिकवाल (Net Sellers) बन गए। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) एक स्थिर शक्ति के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने लगातार चार सत्रों में शुद्ध खरीदारी (Net Buying) की है, जिसमें 13 जुलाई को ₹2,171 करोड़ का कुल निवेश दर्ज किया गया। विदेशी बिकवाली की भरपाई करने में घरेलू खरीदारी की क्षमता आने वाले सत्रों में निवेशकों के लिए निगरानी का एक प्रमुख क्षेत्र बनी रहेगी।
आगे क्या?
इन मैक्रो कारकों से परे, निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से ऊर्जा-संवेदनशील क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव बना रहता है या घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है। आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर बाजार की प्रतिक्रिया, ऊर्जा की कीमतों के विकास के साथ मिलकर, निकट भविष्य में निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) के लिए ट्रेडिंग रेंज तय करने की संभावना है।
