भारतीय शेयर बाज़ारों में आज तेजी के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स **95** अंक ऊपर चढ़े हैं। सेमीकंडक्टर शेयरों में वैश्विक उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों के **$75** प्रति बैरल से नीचे आने से बाज़ार में सकारात्मक माहौल है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने पिछले सत्र में **₹2,000** करोड़ से ज़्यादा के शेयर खरीदकर बाज़ार को सहारा दिया है।
ग्लोबल संकेतों से भारतीय बाज़ार में तेज़ी की उम्मीद
भारतीय शेयर बाज़ार शुक्रवार को अच्छी शुरुआत कर सकते हैं। ग्लोबल बाज़ारों से मिले सकारात्मक संकेतों और कमोडिटी की कीमतों में आई नरमी का असर बाज़ार पर दिख रहा है। गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स, जो निफ्टी 50 के लिए एक शुरुआती संकेतक के तौर पर काम करते हैं, 95 अंक यानी 0.40% ऊपर कारोबार कर रहे थे, जिससे घरेलू सूचकांकों में एक मज़बूत शुरुआत की उम्मीद है।
ग्लोबल हलचल और बाज़ार का मिज़ाज
इस उम्मीद की एक बड़ी वजह वॉल स्ट्रीट पर सेमीकंडक्टर शेयरों में आई ज़बरदस्त रिकवरी है, जिसने बड़े सूचकांकों को ऊपर चढ़ाया। पिछले सत्र में, नैस्डैक कंपोजिट 1.30% बढ़ा, जबकि एसएंडपी 500 में 0.81% की तेज़ी देखी गई। इस मजबूती का असर एशियाई बाज़ारों पर भी पड़ा, जहाँ दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) और जापान के निक्केई 225 (Nikkei 225) जैसे सूचकांकों ने भी अच्छी बढ़त दर्ज की। इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतों में आई नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $71.89 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें $75 के निशान से नीचे आ गई हैं, जिससे महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंताएं कम हुई हैं।
घरेलू संस्थागत निवेशकों का एक्शन
निवेशकों का ध्यान संस्थागत प्रतिभागियों के अलग-अलग रुख पर बना हुआ है। गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों से पता चला कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹532.86 करोड़ के शेयर बेचकर बिकवाली की। हालांकि, इस बिकवाली के दबाव को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹2,057.79 करोड़ की शेयर खरीददारी करके पूरी तरह से पाट दिया। विदेशी निवेशकों की कभी-कभी होने वाली बिकवाली के बावजूद, घरेलू संस्थानों से मिलने वाला यह निरंतर खरीद समर्थन बाज़ार को स्थिर रखने में एक प्रमुख कारक रहा है।
करेंसी और आर्थिक संकेत
पिछले सत्र में भारतीय रुपये (Indian Rupee) में मजबूती देखी गई, जो 0.20% बढ़कर 95.38 पर बंद हुआ। एक स्थिर या मज़बूत रुपया बाज़ार के सेंटिमेंट के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि यह आयात की लागत को कम करता है और मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा, यूएस डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index), जो मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक की मजबूती को मापता है, 100.92 पर बना हुआ है, जो उभरते बाज़ारों की संपत्तियों के लिए अपेक्षाकृत स्थिर माहौल प्रदान करता है।
आगे, निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी शेयरों में मौजूदा तेज़ी जारी रहती है या नहीं, साथ ही तेल की कीमतों में स्थिरता पर किसी भी नई जानकारी पर भी ध्यान दिया जाएगा। ट्रेडिंग सत्र के आगे बढ़ने के साथ, निफ्टी 50 की गुरुवार के 23,962.80 के बंद स्तर से ऊपर बने रहने की क्षमता बाज़ार प्रतिभागियों के लिए मुख्य फोकस रहेगी।
