Reliance की कमाई पर टिकी नज़रें, भारतीय शेयर बाज़ार दिखाएंगे सपाट शुरुआत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Reliance की कमाई पर टिकी नज़रें, भारतीय शेयर बाज़ार दिखाएंगे सपाट शुरुआत

17 जुलाई 2026, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत ज़्यादातर सपाट रहने का अनुमान है। निवेशक ऊंचे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के बीच सावधानी बरत रहे हैं। Reliance Industries, HDFC Bank और ICICI Bank जैसी बड़ी कंपनियों के आने वाले जून तिमाही के नतीजों पर बाज़ार की नज़रें टिकी हैं। मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सेमीकंडक्टर शेयरों में गिरावट भी बाज़ार में सतर्कता का माहौल बना रहे हैं।

Reliance के नतीजों का इंतज़ार, बाज़ार में सधी चाल

भारतीय शेयर बाज़ार में आज, शुक्रवार को, ज़्यादातर सपाट शुरुआत देखने की उम्मीद है। GIFT Nifty फ्यूचर्स में मामूली हलचल इसी ओर इशारा कर रही है। निवेशक फिलहाल बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं क्योंकि वे Nifty 50 इंडेक्स की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों वाले एक अहम वीकेंड के लिए तैयार हो रहे हैं। Reliance Industries आज बाज़ार बंद होने के बाद अपने जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी, जबकि HDFC Bank और ICICI Bank अगले कुछ दिनों में अपने अपडेट्स देंगे। इन नतीजों का खास महत्व है क्योंकि इन कंपनियों की वित्तीय सेहत अक्सर सूचकांकों की दिशा तय करती है।

वैश्विक दबाव और ऊर्जा की कीमतें

भारत में निवेशकों की भावना पर वैश्विक बाज़ार की घटनाओं का भी असर पड़ रहा है, खासकर सेमीकंडक्टर सेक्टर में आई गिरावट का। अमेरिका में टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट के बाद जापान के Nikkei समेत एशियाई बाज़ार भी आज सुस्त खुले हैं। इसके अलावा, मध्य-पूर्व में हालिया सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर चिंता के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $80 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है और देश के व्यापार घाटे पर दबाव पड़ सकता है।

बाज़ार की तकनीकी स्थिति और सेंटीमेंट

तकनीकी तौर पर देखें तो, Nifty इंडेक्स फिलहाल कंसॉलिडेशन (consolidation) यानी एक दायरे में घूमता दिख रहा है। 24,200 का स्तर एक रेजिस्टेंस (resistance) के रूप में काम कर रहा है, जो बताता है कि बाज़ार को अपने मौजूदा दायरे से बाहर निकलने के लिए मजबूत उत्प्रेरक (catalysts) की ज़रूरत है। नीचे की ओर, 24,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण साइकोलॉजिकल सपोर्ट (psychological support) के तौर पर काम कर रहा है। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और रुपये के कमजोर होने से भी बाज़ार में सतर्कता का माहौल बढ़ा है। हालांकि घरेलू आर्थिक संकेतकों में मजबूती दिखी है, लेकिन क्षेत्रीय भू-राजनीतिक जोखिमों और टेक शेयरों में वैश्विक अस्थिरता का संयोजन निकट अवधि में ट्रेडिंग वॉल्यूम को सीमित रख सकता है। सूचकांकों में अगला बड़ा मूव संभवतः प्रमुख बैंकों और बड़े समूहों की आगामी कमाई रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, खासकर मार्जिन और भविष्य के विकास मार्गदर्शन (growth guidance) के मामले में।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.