'Sell in May' की बात पुरानी! कच्चे तेल के झटके से बाजार में बढ़ी चिंता

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
'Sell in May' की बात पुरानी! कच्चे तेल के झटके से बाजार में बढ़ी चिंता
Overview

भारतीय शेयर बाजार के एनालिस्ट्स 'Sell in May' की पुरानी कहावत को खारिज कर रहे हैं। अप्रैल में Nifty 50 और Sensex ने अच्छी बढ़त दर्ज की, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Brent क्रूड के **$108** प्रति बैरल से ऊपर जाने के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे निवेशकों को चुनिंदा स्टॉक पर फोकस करना पड़ रहा है।

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'Sell in May' का मिथक और हकीकत

ऐतिहासिक डेटा के अनुसार, भारतीय बाजारों के लिए 'Sell in May' वाली कहावत ज्यादातर एक मिथक साबित हुई है। पिछले एक दशक में, मई के महीने में Nifty 50 ने औसतन 2.3% का रिटर्न दिया है, और दस में से सात बार यह सकारात्मक रहा। मई में जो गिरावटें देखी गईं, वे अक्सर COVID-19 महामारी या ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी जैसे खास वैश्विक घटनाक्रमों से जुड़ी थीं। अप्रैल में मजबूत रैली देखी गई, जिसमें Nifty 50 ने 7.5% और Sensex ने 6.9% की बढ़त हासिल की, जो मजबूत निवेशक भागीदारी का संकेत था।

कच्चे तेल का बढ़ता झटका

लेकिन, इन सब के बीच पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संकट, खासकर ईरान संघर्ष, ने Brent क्रूड ऑयल की कीमतों को $108.14 प्रति बैरल के आसपास बनाए रखा है। इस संकट के चलते कीमतें $124-$125.5 तक जा सकती हैं। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी 85% से अधिक तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। कच्चे तेल में हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी खुदरा महंगाई को 0.2-0.4% तक बढ़ा सकती है और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को लगभग $10-$15 बिलियन तक बढ़ा सकती है, जो ऐतिहासिक रूप से वित्तीय अस्थिरता का संकेत देने वाले जीडीपी के 2.5-3% के पार जा सकता है।

वैल्यूएशन और मैक्रो कंसर्न्स

बाजार की हालिया रैली के बावजूद, भारतीय इक्विटी बाजार एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। Nifty 50 का वैल्यूएशन (P/E रेश्यो लगभग 20.9) अपने 10 साल के औसत ~24.79 से नीचे आ गया है, जो फंडामेंटल्स के आधार पर प्रदर्शन की गुंजाइश दिखाता है। हालांकि, भू-राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते तेल की कीमतें मैक्रोइकॉनॉमिक तस्वीर को धुंधला कर रही हैं।

बढ़ते खतरों का सिलसिला

लगातार उच्च तेल कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न होने वाले खतरों को कम करके नहीं आंका जा सकता। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर रहने पर भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी के 4% तक पहुंच सकता है, जो विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने और रेटिंग एजेंसियों द्वारा डाउनग्रेड का कारण बन सकता है। एलपीजी और केरोसिन जैसी वस्तुओं पर सब्सिडी बिल बढ़ने से फिस्कल डेफिसिट पर भी दबाव बढ़ेगा। खुदरा महंगाई में हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से 0.2-0.4% की वृद्धि की उम्मीद है, जिससे परिवारों के बजट और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।

RBI की दुविधा और आगे का रास्ता

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक मुश्किल स्थिति में है। महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जो आर्थिक विकास को धीमा कर सकती हैं। एक कमजोर रुपया, जो उच्च आयात बिलों से और बदतर हो सकता है, महंगाई को और बढ़ाएगा और डॉलर-डिनॉमिनेटेड कर्ज की लागत बढ़ाएगा। कुछ विश्लेषकों ने पहले ही कमाई के अनुमानों में कटौती करना शुरू कर दिया है। JP Morgan ने पश्चिम एशिया युद्ध के कारण MSCI इंडिया ईपीएस ग्रोथ के अनुमानों को CY26 के लिए 11% और CY27 के लिए 13% तक कम कर दिया है।

भविष्य का आउटलुक

हालांकि 'Sell in May' रणनीति को खारिज किया जा रहा है, लेकिन भारतीय इक्विटी के लिए भविष्य का आउटलुक मिश्रित है। ब्रोकरेज रिपोर्टों का सुझाव है कि अल्पावधि में अस्थिरता की संभावना के बावजूद, मध्यम अवधि के रुझान बुलिश (तेजी वाले) हैं, और आय वृद्धि (earnings growth) अगली रैली को गति देगी। FY27 के लिए Nifty ईपीएस का अनुमान 13% की वृद्धि के साथ ₹1,232 से ₹1,280-₹1,320 तक है। कुछ विश्लेषकों को उम्मीद है कि Nifty 50 मार्च 2027 तक 28,000–31,000 तक पहुंच सकता है, जो भू-राजनीतिक तनावों के कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी पर निर्भर करेगा। RBI ने FY2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.9% और उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति लगभग 4.6% रहने का अनुमान लगाया है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.