तेल की कीमतों में नरमी और भू-राजनीतिक जोखिम
बुधवार को बाज़ार में आई तेजी का मुख्य कारण UAE का OPEC से बाहर निकलने का अचानक फैसला था। इस कदम से ग्लोबल ऑयल सप्लाई बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतें कम होने की उम्मीद जगी। इस खबर से भारत की इंपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिली। हालांकि, ब्रेंट क्रूड ऑयल $114 प्रति बैरल के करीब बना रहा, और घरेलू फ्यूचर्स ₹9,800 की ओर बढ़ते दिखे। अमेरिका-ईरान संघर्ष और हॉरमूज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव जैसे भू-राजनीतिक जोखिमों ने एनर्जी मार्केट्स में अनिश्चितता बनाए रखी।
सेक्टर्स का प्रदर्शन
इस सेशन में ब्रॉड-बेस्ड तेजी देखी गई। FMCG सेक्टर 1.7% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद रियलटी सेक्टर में करीब 1.3% की तेजी आई, और ऑटो व आईटी सेक्टर में भी लगभग 1% का इजाफा हुआ। ITC, Reliance Industries, Maruti Suzuki और Tech Mahindra जैसे हैवीवेट स्टॉक्स ने इंडेक्स को सहारा दिया। दूसरी ओर, मीडिया सेक्टर में करीब 0.6% की गिरावट आई, और PSU बैंक्स, फाइनेंशियल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स स्टॉक्स पर हल्की बिकवाली का दबाव रहा। IndiGo और Dr. Reddy's जैसे स्टॉक्स में गिरावट देखी गई।
नतीजों और मैक्रो इकोनॉमिक सपोर्ट से बूस्ट
कंपनी के नतीजों ने भी बाज़ार सेंटिमेंट को बढ़ाया। Bandhan Bank ने बेहतर एसेट क्वालिटी के दम पर चौथी तिमाही में अपना नेट प्रॉफिट 68% बढ़ाकर ₹534 करोड़ दर्ज किया। Maruti और अन्य ऑटो मेजर के नतीजों ने डोमेस्टिक डिमांड में विश्वास बढ़ाया। अर्निंग सीजन जारी है, गुरुवार को Bajaj Finserv, HUL, Adani Enterprises और NSDL के अहम नतीजे आने की उम्मीद है। वहीं, मैक्रो इकोनॉमिक डेटा के अनुसार, मार्च में भारत का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स 4.1% बढ़ा, जिसमें कैपिटल गुड्स आउटपुट 14.6% उछला, जो मजबूत निवेश मांग का संकेत देता है। सरकार इंपोर्ट निर्भरता कम करने के लिए नई यूरिया इन्वेस्टमेंट पॉलिसी भी तैयार कर रही है।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 30 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 94.8 के करीब बंद हुआ। इस गिरावट का मुख्य कारण फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (FII) का लगातार आउटफ्लो, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और इंपोर्टर्स की डॉलर मांग को बताया गया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) फिलहाल बाज़ार से दूर रहा। डीलर्स का अनुमान है कि USDINR 94.10 और 95.15 के बीच ट्रेड कर सकता है, जिसमें डॉलर के पक्ष में झुकाव रहने की उम्मीद है।
ग्लोबल इकोनॉमी पर नजर
निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट फैसले और फेडरल रिजर्व चेयर जेरोम पॉवेल के प्रेस कॉन्फ्रेंस का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो ग्लोबल लिक्विडिटी और रिस्क सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है। CoinSwitch के को-फाउंडर आशीष सिंघल ने कहा, "स्थिर दरें जरूरी नहीं कि निगेटिव हों; वे पॉलिसी स्पष्टता प्रदान करती हैं।" Religare Broking के अजीत मिश्रा ने कहा कि बाज़ार अमेरिकी फेड मीटिंग पर प्रतिक्रिया देगा, जबकि ऊंचे क्रूड, आउटफ्लो और कमजोर रुपया तेजी को सीमित कर सकते हैं।
निफ्टी के लिए, 24,400 के ऊपर एक निर्णायक क्लोज 24,600–24,800 की ओर बढ़ने के लिए ज़रूरी है, जबकि 23,950 के पास 20-दिन EMA से नीचे जाने पर इंडेक्स 23,600 तक गिर सकता है।
