आज यानी शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते Sensex और Nifty 50 में अच्छी उछाल आई। रुपए में मजबूती भी बाज़ार को सहारा दे रही है, हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
क्या हुआ आज?
भारतीय शेयर बाज़ारों ने आज की शुरुआत मज़बूत शुरुआत के साथ की। BSE Sensex 921.30 अंकों की बढ़त के साथ 74,753.85 के स्तर पर खुला। वहीं, NSE Nifty 50 भी 254.20 अंक चढ़कर 23,417.25 पर पहुंच गया। इस तेज़ी की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वो ऐलान है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ अमेरिका की सैन्य संलग्नता को समाप्त करने की बात कही है। इस बयान से वैश्विक बाज़ारों, जिनमें भारत भी शामिल है, में सकारात्मक माहौल बना है और एक लंबे संघर्ष की आशंकाएं कम हुई हैं।
तेल की घटती कीमतों का महत्व
इस ख़बर का सबसे बड़ा और सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड, जो कि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क है, 1.07% गिरकर $89.41 प्रति बैरल पर आ गया है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, यह एक बहुत अच्छी ख़बर है।
जब तेल की कीमतें गिरती हैं, तो ऊर्जा आयात की लागत कम हो जाती है। इससे भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) को संभालने में मदद मिलती है, जो आयात के लिए होने वाले भुगतान और देश में आने वाले पैसे का अंतर होता है। इसके अलावा, आयात बिल कम होने से महंगाई (Inflation) को काबू में रखने में भी मदद मिलती है, जिसे इक्विटी मार्केट (Equity Market) के लिए सकारात्मक माना जाता है।
रुपए की प्रतिक्रिया
इस ख़बर पर भारतीय रुपए ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। डॉलर के मुकाबले रुपया 65 पैसे मज़बूत होकर शुरुआती कारोबार में 95.20 पर कारोबार कर रहा था। एक मज़बूत रुपया अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि इससे आयात की लागत कम हो जाती है, खासकर तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीज़ों के लिए जिनका भुगतान डॉलर में होता है।
FIIs की बिकवाली का रुझान
जहां शुक्रवार को बाज़ार का माहौल बेहद सकारात्मक था, वहीं निवेशकों के लिए यह ध्यान देना ज़रूरी है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) क्या कर रहे हैं। बाज़ार में मौजूदा तेज़ी के बावजूद, एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने पिछले कारोबारी दिन, गुरुवार को ₹1,987.09 करोड़ के शेयर बेचे थे।
यह एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है। एक तरफ, बाज़ार कम भू-राजनीतिक जोखिम और तेल की कीमतों को लेकर बेहतर मैक्रो-इकोनॉमिक (Macro-economic) हालात पर प्रतिक्रिया दे रहा है। दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाज़ार की ऊपर की ओर जाने वाली गति को धीमा कर सकती है। निवेशक आमतौर पर इस बात पर नज़र रखते हैं कि क्या बिकवाली का यह रुझान जारी रहता है या आने वाले सत्रों में विदेशी खरीदार वापस आते हैं।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
आने वाले कुछ दिनों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट कितनी स्थायी है। अगर कीमतें कम बनी रहती हैं, तो यह तेल और ईंधन पर निर्भर रहने वाले सेक्टर्स के लिए एक स्थिर माहौल प्रदान करेगा। इसके विपरीत, यदि भू-राजनीतिक तनाव फिर से बढ़ता है या वैश्विक मांग में बदलाव आता है, तो तेल की कीमतों में फिर से तेज़ी आ सकती है।
इसके अलावा, निवेशक देखेंगे कि क्या मौजूदा तेज़ी विदेशी संस्थागत निवेशकों के व्यवहार में कोई बदलाव लाती है। बाज़ार इस बात पर भी बारीकी से नज़र रखेगा कि क्या रुपया डॉलर के मुकाबले अपनी बढ़त बनाए रख पाता है। हमेशा की तरह, बाज़ार की समग्र दिशा इन बाहरी वैश्विक कारकों और फंड के आंतरिक प्रवाह, दोनों पर निर्भर करेगी।
