IT सेक्टर ने खींची मार्केट को राह
आज शेयर बाज़ार में Sensex और Nifty दोनों ही कल की गिरावट से उबरते हुए अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए। इस ज़बरदस्त वापसी के पीछे मुख्य वजह रही इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर का शानदार प्रदर्शन। Sensex 509.73 अंक यानी 0.69% की तेज़ी के साथ 74,616.58 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 ने 155.40 अंक यानी 0.68% की बढ़त हासिल कर 23,123.65 का स्तर छुआ। Nifty IT इंडेक्स में करीब 2.50% का उछाल देखा गया, जिसे ग्लोबल मार्केट से मिले पॉज़िटिव सिग्नल्स और IT कंपनियों के मजबूत स्पेंडिंग के अनुमानों ने बल दिया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ सालों में क्लाउड, AI और मॉडर्नाइजेशन में बिज़नेस इन्वेस्टमेंट के चलते भारतीय IT सर्विसेज स्पेंडिंग में सालाना 12% से 14% की ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
मार्केट वैल्यूएशन और ग्लोबल फैक्टर्स का खेल
अगर मार्केट वैल्यूएशन की बात करें, तो अप्रैल 2026 की शुरुआत तक Sensex का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 20.150 और Nifty 50 का 20.18 (कंसॉलिडेटेड बेसिस पर) था। ये वैल्यूएशन बताते हैं कि बाज़ार ज़्यादा महंगा नहीं है, लेकिन भविष्य की कमाई (earnings) और ब्याज दरों (interest rates) को लेकर थोड़ा संवेदनशील है। 7 अप्रैल, 2026 को एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला रुझान दिखा, जापान का Nikkei 225 और चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त पर थे। हालांकि, पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन और क्रूड ऑयल की कीमतों पर इसका असर एक बड़ी चिंता बना हुआ है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) अप्रैल की शुरुआत से ही बिकवाली कर रहे हैं, 7 अप्रैल को लगभग ₹8,641.76 करोड़ की नेट आउटफ्लो देखी गई। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) लगातार खरीदारी कर बाज़ार को सहारा दे रहे हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पॉलिसी घोषणाएं भी बाज़ार को अक्सर प्रभावित करती हैं; रेट कट से सेंटीमेंट सुधरता है, जबकि अनपेक्षित बदलाव वोलेटिलिटी ला सकते हैं। 8 अप्रैल, 2026 को होने वाली RBI की पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने की उम्मीद है। यहाँ मुख्य फोकस RBI के इंफ्लेशन और ग्रोथ के आकलन पर रहेगा, खासकर बढ़ते ग्लोबल ऑयल प्राइस और कमजोर होते रुपये के चलते, जो इंफ्लेशन को बढ़ा सकते हैं।
FII बिकवाली और इंफ्लेशन का खतरा अभी बाकी
आज की तेज़ी के बावजूद, भारतीय बाज़ार के लिए कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की लगातार बिकवाली, जो ग्लोबल अनिश्चितताओं और करेंसी दबाव के कारण हो रही है, एक चुनौती पेश करती है। पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति क्रूड ऑयल की कीमतों को $100 प्रति बैरल से ऊपर धकेल रही है, जिससे भारत की इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ रही है और इंफ्लेशन भड़कने का खतरा है—जो RBI के लिए एक बड़ी चिंता है। यह इम्पोर्टेड इंफ्लेशन घरेलू ग्रोथ को धीमा कर सकती है और RBI को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर कर सकती है, जिससे रेट कट में देरी हो सकती है। इसके अलावा, IT सेक्टर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन 2026 में अनुमानित सैलरी हाइक 2025 के 7.6% से घटकर 6.9% पर आने की उम्मीद है। यह कुछ एक्सपोर्ट मार्केट्स में मार्जिन प्रेशर या मांग में बदलाव का संकेत हो सकता है, भले ही भारतीय IT स्पेंडिंग 2026 में $176 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें सर्विसेज 11.1% की दर से बढ़ेंगी।
RBI पॉलिसी और अर्निंग्स पर सबकी नज़र
निकट भविष्य में बाज़ार की दिशा काफी हद तक RBI की पॉलिसी के फैसले और उसके फॉरवर्ड गाइडेंस पर निर्भर करेगी। भले ही ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद है, लेकिन केंद्रीय बैंक का इंफ्लेशन और आर्थिक ग्रोथ पर टिप्पणी, खासकर अस्थिर ग्लोबल एनर्जी प्राइस के बीच, महत्वपूर्ण होगी। निवेशक प्रमुख IT कंपनियों जैसे TCS के नतीजे भी आने का इंतज़ार कर रहे हैं, जो सेक्टर के प्रदर्शन पर और अधिक जानकारी दे सकते हैं।