US-Iran टेंशन से दहल गए शेयर बाजार! Sensex, Nifty धराशायी, जानें क्यों

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
US-Iran टेंशन से दहल गए शेयर बाजार! Sensex, Nifty धराशायी, जानें क्यों
Overview

US और Iran के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और कच्चे तेल की कीमतों में **$100** प्रति बैरल के पार जाने की वजह से सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। हालांकि, इस बिकवाली के बीच Power, Defence और Telecom जैसे सेक्टरों ने कुछ मजबूती दिखाई।

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भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजारों पर असर

US-Iran के बीच असफल बातचीत और ईरान पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी की घोषणा ने वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा दिया। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजारों ने इसी तनाव के चलते गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 8% से अधिक उछलकर $104 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं। इस 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट (Risk-off Sentiment) का असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर भी दिखा। BSE Sensex 702.68 अंक यानी 0.91% की गिरावट के साथ 76,847.57 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 207.95 अंक या 0.86% की कमजोरी के साथ 23,842.65 पर आ गया।

डिफेंस और पावर सेक्टर में दिखी मजबूती

जहां बाजार में व्यापक बिकवाली का माहौल था, वहीं Power, Defence और Telecom सेक्टरों ने बाकी सेक्टरों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इन सेक्टरों ने सामान्य गिरावट का रुख नहीं अपनाया, जो उनकी अंदरूनी मजबूती या सरकारी नीतियों के सहारे को दर्शाता है। इसके विपरीत, FMCG, Auto, IT और Oil & Gas जैसे सेक्टरों में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। Nifty Auto इंडेक्स 2.09% लुढ़ककर सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टरों में से एक रहा। ईंधन की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति की चिंताओं का सीधा असर ऑटो सेक्टर जैसी कंज्यूमर-फेसिंग इंडस्ट्री पर पड़ा।

बाजार की गिरावट में भी चमके कुछ शेयर

बाजार में व्यापक मंदी के बावजूद, BSE पर 120 से अधिक स्टॉक्स ने अपने 52-हफ्ते के नए उच्च स्तर (52-week Highs) को पार किया। यह दिखाता है कि व्यक्तिगत कंपनियों की अपनी मजबूत बुनियाद और सेक्टर-विशिष्ट अवसर बाजार की समग्र चाल से अलग चल सकते हैं। Puravankara Limited ने Q4 में 190% की सालाना बढ़ोतरी के साथ ₹3,547 करोड़ की बिक्री दर्ज करने के बाद शेयर में लगभग 11% की तेजी देखी गई। इसी तरह, Enviro Infra Engineers को पानी और अपशिष्ट जल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए ₹972.2 करोड़ के दो EPC अनुबंध मिलने की घोषणा के बाद स्टॉक में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।

भारत की तेल पर निर्भरता और अन्य जोखिम

भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल पर, भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति देश को अधिक संवेदनशील बनाती है। $100 प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल न केवल महंगाई को हवा दे रहा है, बल्कि भारतीय रुपये पर भी दबाव डाल रहा है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है। इसके अलावा, Jyoti CNC Automation की फ्रेंच सब्सिडियरी Huron Graffenstaden SAS पर निर्यात नियंत्रण नियमों के कथित उल्लंघन के कारण €4 मिलियन की संपत्ति जब्त की गई है। वहीं, Unichem Laboratories ने गुणवत्ता संबंधी खामियों के चलते अमेरिका में Buspirone Hydrochloride tablets की स्वैच्छिक रिकॉल (Voluntary Recall) की है, जो विदेशी बाजारों के कड़े नियामक माहौल को दर्शाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.