वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंताओं के बीच, भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को भारी बिकवाली देखी गई। इस 'रिस्क-ऑफ' (risk-off) सेंटिमेंट ने लगातार तीन दिनों की तेजी पर लगाम लगा दी।
घबराहट के माहौल में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1.48% की गिरावट के साथ 82,498.14 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 1.41% लुढ़ककर 25,454.35 के स्तर पर आ गया। इस बड़ी गिरावट के कारण शेयर बाजार में निवेशकों की कुल संपत्ति में ₹6.79 लाख करोड़ का भारी नुकसान हुआ।
बाजार की बढ़ती अस्थिरता का सूचक, इंडिया VIX (India VIX) 10% से अधिक उछलकर 13.50 के करीब पहुँच गया, जो निवेशकों के डर को दर्शाता है। बिकवाली का असर लगभग हर सेक्टर में दिखा, जिसमें एविएशन, ऑटो, बैंकिंग और FMCG सेक्टर खासतौर पर प्रभावित हुए। मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी खासी गिरावट आई, जिससे बाजार की बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता स्पष्ट हुई।
इस गिरावट का सबसे बड़ा ट्रिगर (trigger) अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव रहा। अमेरिकी सेना द्वारा संभावित हमलों की तैयारी की खबरों ने वैश्विक संघर्ष की आशंकाओं को हवा दी। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, ब्रेंट क्रूड $71.50 प्रति बैरल और WTI क्रूड $66.50 प्रति बैरल के करीब पहुंच गए। इससे भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए सप्लाई में व्यवधान और महंगाई (inflation) बढ़ने का डर बढ़ गया।
इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की जनवरी की मीटिंग मिनट्स (minutes) से भी चिंताएं बढ़ीं। इन मिनट्स ने संकेत दिया कि यदि महंगाई अनियंत्रित रहती है, तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका के 10-साल के ट्रेजरी यील्ड (10-Year Treasury Yields) 4.10% से ऊपर चले गए, जो उभरते बाजारों (emerging markets) से पूंजी को बाहर खींच सकते हैं और भारतीय रुपये (Indian Rupee) जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ा सकते हैं। USD/INR विनिमय दर 91.1700 पर पहुंच गई।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट में ऊंचे वैल्यूएशन (valuations) ने उन्हें बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है। Nifty स्मॉल-कैप 100 का P/E (Price to Earnings ratio) 30.7 और Nifty मिड-कैप 100 का P/E 33.45 पर था, जो MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स के 18.32 के P/E की तुलना में काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि इन भारतीय सूचकांकों में 'ओवरवैल्यूएशन' (overvaluation) का जोखिम था।
यह गिरावट फरवरी 2025 की बड़ी करेक्शन (correction) की याद दिलाती है, जब Nifty स्मॉल-कैप 100 में 13.07% और Nifty मिड-कैप 100 में 10.8% की गिरावट आई थी। विश्लेषक अब सावधानी बरतने और फंडामेंटली मजबूत शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि निफ्टी 50 को 26,000 के स्तर को पार करना होगा, ताकि बाजार में फिर से तेजी का सेंटिमेंट बन सके। अगले कुछ दिनों में, भू-राजनीतिक विकास और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे।