वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों और मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच आज, 10 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजारों ने सपाट चाल के साथ कारोबार की शुरुआत की।
यह कल, 9 अप्रैल की भारी गिरावट के बाद हुआ, जब बेंचमार्क इंडेक्स में प्रॉफिट-बुकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में बिकवाली हावी रही, जिसने लगातार पांच दिनों की तेजी पर रोक लगा दी।
आज सुबह, GIFT Nifty लगभग 23,918.50 पर कारोबार कर रहा था, जो कल की गिरावट के बाद मामूली सुधार का संकेत दे रहा था। हालांकि, कल के कारोबार में Sensex 76,631.65 पर 931.25 अंक ( 1.20%) और Nifty 50 23,775.10 पर 222.25 अंक ( 0.93%) गिरकर बंद हुए थे, जिसने पांच दिन की रैली को तोड़ दिया था।
बाजार की ऊंची वैल्यूएशन भी चिंता का सबब बनी हुई है। खासकर फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में HDFC Bank और ICICI Bank का P/E रेश्यो ( 15.83-16.77 और 16.2-16.63) बैंकिंग इंडस्ट्री के औसत 12.6 से काफी ऊपर चल रहा है। वहीं, Nifty 50 का ओवरऑल P/E रेश्यो भी 20.89-21.20 के आसपास है, जो मौजूदा आर्थिक हालात में किसी भी खराब नतीजे के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं छोड़ता।
वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी शेयर बाजार कल 9 अप्रैल को बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिसका एक कारण मिडिल ईस्ट में शांति वार्ता की खबरें थीं। हालांकि, एशियाई बाजारों में सीमित तेजी देखी गई, क्योंकि व्यापारी शांति वार्ता को लेकर सतर्क थे। यह मिला-जुला वैश्विक रुख भारतीय बाजारों को कोई स्पष्ट दिशा नहीं दे रहा।
मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भारत के आर्थिक दृष्टिकोण को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका, ईरान और लेबनान से जुड़े संघर्षों ने सप्लाई में रुकावट के डर को फिर से जगा दिया है, खासकर होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर। सीज़फायर समझौतों के बावजूद, कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। WTI फ्यूचर्स कल 98.65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहे थे। यह भारत के लिए एक बड़ी चिंता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 85-88% कच्चा तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत की GDP ग्रोथ को लगभग 0.5% घटा सकती है और थोक महंगाई को 0.7-1% तक बढ़ा सकती है। ऊंची तेल कीमतें करंट अकाउंट डेफिसिट को भी बढ़ाती हैं, सरकारी खजाने पर दबाव डालती हैं और भारतीय रुपये पर दबाव बनाती हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें औसतन 100 डॉलर प्रति बैरल रहीं, तो FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 6.5% रह सकती है, और महंगाई 5% से ऊपर जा सकती है। यह लगातार तेल मूल्य झटका रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए नीतिगत निर्णय लेना मुश्किल बना रहा है और महंगाई को बढ़ावा दे रहा है।
बाजार में एक अहम रुझान निवेशकों के प्रवाह में लगातार आ रहा अंतर है। Foreign Institutional Investors (FIIs) बिकवाली जारी रखे हुए हैं, जिनका इस साल 2026 में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आउटफ्लो हो चुका है। अकेले मार्च में, FIIs ने रिकॉर्ड 1.14 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। यह बिकवाली वैश्विक अनिश्चितताओं जैसे भू-राजनीतिक जोखिमों, बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स और मुद्रा के कमजोर होने से जुड़ी है। इसके विपरीत, Domestic Institutional Investors (DIIs) सक्रिय रूप से खरीददारी कर रहे हैं, जिन्होंने 2026 में 1.73 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है और बिकवाली के दबाव को झेल रहे हैं। इस घरेलू खरीददारी ने बाजार को सहारा दिया है, जो स्थानीय पूंजी पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। हालांकि, FIIs का आउटफ्लो अभी भी बाजार की मजबूत रिकवरी को सीमित करने वाला एक प्रमुख कारक बना हुआ है।
बाजार पर कई जोखिम बने हुए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण अल्पावधि के दृष्टिकोण में विश्वास की कमी को दर्शाती है। ऐसे ही आउटफ्लो जारी रहे तो विदेशी पूंजी के प्रति संवेदनशील सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में संघर्षों का कोई भी बढ़ना महंगाई को तेजी से बढ़ा सकता है, करंट अकाउंट डेफिसिट को चौड़ा कर सकता है और भारतीय रुपये को कमजोर कर सकता है। बाजार का मूल्यांकन, Nifty P/E लगभग 20.89-21.20 के साथ, किसी भी नकारात्मक आश्चर्य के मामले में, खासकर मामूली कमाई वृद्धि के अनुमानों को देखते हुए, बहुत कम मार्जिन छोड़ता है।
विश्लेषक सतर्क बने हुए हैं और भू-राजनीतिक घटनाओं व उनके आर्थिक प्रभावों से लगातार उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि कुछ संकेत जमाव की ओर संभावित बदलाव का सुझाव देते हैं, एक स्पष्ट अपट्रेंड के लिए प्रतिरोध स्तरों से ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट की आवश्यकता होगी। तत्काल भविष्य भू-राजनीतिक तनावों के कम होने, कच्चे तेल की स्थिर कीमतों और FIISentiment में बदलाव पर निर्भर करेगा। तब तक, बाजार संभवतः वैश्विक समाचारों और घरेलू डेटा पर प्रतिक्रिया करेगा, जिसमें फाइनेंशियल और एनर्जी शेयरों पर ध्यान केंद्रित रहेगा।