Indian Markets: बजट का बूस्ट, FII की चिंता, शेयर बाजार में उथल-पुथल!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Markets: बजट का बूस्ट, FII की चिंता, शेयर बाजार में उथल-पुथल!
Overview

भारतीय शेयर बाजार ने **2 फरवरी 2026** को यूनियन बजट के बाद बढ़त हासिल की। मेटल और एनर्जी शेयरों में आई मजबूती ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की लगातार बिकवाली और डेरिवेटिव्स पर STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में बदलाव ने थोड़ी घबराहट बढ़ा दी है। ब्रोकरेज हाउसेस सलाह दे रहे हैं कि ऐसे उतार-चढ़ाव के बीच रिटेल निवेशकों को अपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) जारी रखने चाहिए।

बजट का बूस्ट और FII की टेंशन

यूनियन बजट में ग्रोथ पर फोकस के बावजूद, शेयर बाजार पर फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली का असर साफ दिख रहा है। बाजार की यह चाल बता रही है कि निवेशक बजट में ग्रोथ पहलों के साथ-साथ फिस्कल प्रूडेंस (राजकोषीय अनुशासन) पर दिए गए जोर को समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, FIIs के पैसे निकालने की आशंका और डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर हालिया टैक्स बदलावों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

बजट से GDP ग्रोथ और कमाई का अनुमान

Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, डॉ. VK विजयकुमार का कहना है कि बजट में फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए 10% नॉमिनल GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है। यह आंकड़ा हासिल करने लायक है और इससे कंपनियों की कमाई में करीब 15% की बढ़ोतरी हो सकती है। शेयर बाजार जल्द ही इस पॉजिटिव आउटलुक को डिस्काउंट कर सकता है, जो एक मजबूत कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस का संकेत दे रहा है। बजट का मकसद इकोनॉमिक डेवलपमेंट को बनाए रखना है, जिसमें विस्तार और फिस्कल डिसिप्लिन दोनों पर जोर दिया गया है। Geojit Investments को उम्मीद है कि ये कमाई के अनुमान बाजार की वैल्यूएशन में शामिल होंगे, जिससे तेजी आ सकती है।

STT का झटका और FII की बिकवाली

बाजार की चाल पर FIIs की लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जो आगे की तेजी को सीमित कर सकता है। इससे पहले, डेरिवेटिव्स (F&O) पर STT में अचानक बढ़ोतरी के कारण शेयर बाजार में तेज गिरावट देखी गई थी। विजयकुमार के मुताबिक, यह एक 'नीरजर्क प्रतिक्रिया' (knee-jerk reaction) थी। इस कदम का मकसद उन हाई-रिस्क रिटेल ट्रेडर्स को रोकना था, जिनमें से 92% को नुकसान होता है। हालांकि, इससे मार्केट सेंटीमेंट पर गहरा असर पड़ा है। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में किसी बदलाव की उम्मीद, जो कुछ बाजार भागीदारों के लिए अवास्तविक थी, भी हाल की अनिश्चितता का एक कारण बनी।

सेक्टर की मजबूती और निवेशकों के लिए सलाह

शुरुआती बढ़त में मेटल और एनर्जी सेक्टरों में आई मजबूती ने अहम भूमिका निभाई, जो स्पेसिफिक इंडस्ट्रीज में निवेशकों की दिलचस्पी को दर्शाता है। इन उतार-चढ़ावों के बावजूद, डॉ. विजयकुमार ने रिटेल निवेशकों को अपनी इन्वेस्टमेंट डिसिप्लिन बनाए रखने की सलाह दी है, खासकर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) के जरिए। उनका मानना है कि एक बड़ी बाजार में तेजी आने में कुछ समय लग सकता है, जो शायद ग्लोबल ट्रेंड्स के AI-ड्रिवन ट्रेडिंग से दूर होने के साथ मेल खाए। फिर भी, आने वाले समय में कमाई में तेजी का अनुमान ग्रोथ-ओरिएंटेड बजट का एक स्पष्ट पॉजिटिव नतीजा है, जो लंबी अवधि के लिए बाजार में भागीदारी का एक फंडामेंटल आधार प्रदान करता है।

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