बैंकिंग ने भारतीय शेयरों को दी रफ्तार, IT सेक्टर पिछड़ा
गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स पिछले दिन की रिकवरी को आगे बढ़ाते दिखे। BSE Sensex 450.51 अंक या 0.60% की तेजी के साथ 75,059.49 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 169.95 अंक या 0.73% बढ़कर 23,582.55 पर कारोबार कर रहा था। इस शुरुआती बढ़त को मुख्य रूप से बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों के दमदार प्रदर्शन से बल मिला, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और मेटल जैसे सेक्टरों का भी योगदान रहा। बैंकिंग सेक्टर की मजबूती के पीछे क्रेडिट ग्रोथ में लगातार बढ़ोतरी और मजबूत बैलेंस शीट की रिपोर्टें बताई जा रही हैं।
ग्लोबल टेंशन और IT की चिंताएं IT शेयरों पर भारी
बाजार की व्यापक बढ़त के बावजूद, टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। HCL Technologies, Infosys, Tata Consultancy Services और Tech Mahindra जैसी प्रमुख IT कंपनियां लाल निशान में कारोबार कर रही थीं। यह अंतर निवेशकों की वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं और व्यापार विवादों के IT सेक्टर पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंताओं को दर्शाता है। जारी US-China Summit, हालांकि कुछ उम्मीदें जगा रही है, लेकिन अनिश्चितता भी ला रही है, खासकर टेक्नोलॉजी ट्रेड और सप्लाई चेन को लेकर। ऐतिहासिक रूप से, US-China व्यापार तनाव भारतीय IT शेयरों में बड़ी गिरावट का कारण रहा है, जो अमेरिकी बाजारों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि जनरेटिव AI (Generative AI) से जुड़े डर और आर्थिक अनिश्चितता इस सेक्टर के कमजोर प्रदर्शन में योगदान दे रहे हैं, जिससे पारंपरिक IT सर्विसेज से रेवेन्यू पर दबाव पड़ सकता है।
डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स ने संभाली विदेशी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को ₹4,703.15 करोड़ के शेयर बेचकर अपनी बिकवाली जारी रखी। हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹5,869.05 करोड़ के शेयर खरीदकर इस बिकवाली को आक्रामक तरीके से संभाला। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, DIIs का यह मजबूत समर्थन भारतीय बाजार को स्थिर करने में एक महत्वपूर्ण कारक रहा है, और इक्विटी में DIIs की हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि देखी गई है। एशियाई बाजारों में मिली-जुली चाल रही, जहां दक्षिण कोरिया और जापान में AI से जुड़ी उम्मीदों और सेमीकंडक्टर की मांग के कारण नए शिखर बने। वहीं, चीन का शंघाई कंपोजिट नीचे आया और अमेरिकी बाजारों में मिली-जुली चाल दिखी। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और कमजोर पड़ता रुपया भी बाजार की धारणा में सावधानी बरतने के संकेत दे रहे हैं।
बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और व्यापक बाजार जोखिम
हालांकि बैंकिंग सेक्टर घरेलू मांग और संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार के दम पर वर्तमान में मजबूत दिख रहा है, लेकिन व्यापक बाजार जोखिम बने हुए हैं। विदेशी निवेशक घरेलू खपत और ब्याज दर-संवेदनशील वित्तीय क्षेत्रों से हटकर ग्लोबल स्तर पर तुलनीय संचार सेवा (Communication Services) और स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो एक सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है। IT सेक्टर के लिए, प्रमुख जोखिमों में US-China Summit से उत्पन्न संभावित व्यापार व्यवधान और प्रौद्योगिकी प्रतिबंध शामिल हैं। AI (Artificial Intelligence) से भविष्य में विकास की उम्मीद है, लेकिन अल्पावधि की चुनौतियाँ जैसे राजस्व पर दबाव और रोजगार विस्थापन चिंताएं हैं। यदि भू-राजनीतिक संघर्ष बढ़ता है, जिससे ऊर्जा की कीमतों में लगातार वृद्धि और रुपये में और गिरावट आती है, तो बैंकिंग सेक्टर को भी हेडविंड का सामना करना पड़ सकता है, जो मध्यम अवधि में आर्थिक विकास और क्रेडिट गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
भारत के प्रमुख सेक्टर्स के लिए आउटलुक
IT सेक्टर का आउटलुक विकसित हो रहे भू-राजनीतिक परिदृश्य और AI को अपनाने की गति बनाम व्यवधान पर निर्भर करेगा। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि भारतीय IT उद्योग 2026 में AI सेवाओं की मांग से एक तेज रिकवरी देख सकता है, लेकिन व्यवधान से जुड़ी निकट अवधि की चुनौतियाँ बनी रहेंगी। बाजार व्यापार स्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के समाधान पर किसी भी संकेत के लिए US-China Summit के नतीजों पर बारीकी से नजर रखेगा, जो व्यापक बाजार भावना और क्षेत्र-विशिष्ट प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
