भू-राजनीतिक तनाव का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खास तौर पर ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीदों को तोड़ दिया है। इसका सीधा असर एनर्जी मार्केट पर हुआ, जहां ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $96 प्रति बैरल के पार चली गईं। भारत, जो अपनी 80% से अधिक कच्चे तेल की जरूरतें आयात से पूरी करता है, के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों में किसी भी व्यवधान की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है, जिससे भारत के फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) के बढ़ने और रुपये के कमजोर होने का खतरा मंडरा रहा है।
ग्लोबल टेक के झटके का असर
इसके साथ ही, शुक्रवार को अमेरिकी नैस्डैक (Nasdaq) इंडेक्स में 4.18% की भारी गिरावट के बाद एशियाई शेयर बाजारों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग जैसे बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी जॉब्स डेटा के मजबूत आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) से ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदों को भी कम कर दिया है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें (Higher for longer interest rates) आमतौर पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर विकसित देशों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जिससे घरेलू तरलता (Liquidity) पर दबाव पड़ता है।
सेक्टरों पर मार और जोखिम
इस बिकवाली का असर लगभग सभी सेक्टर्स पर देखा गया, खासकर निफ्टी रियलिटी (Realty), मेटल (Metal) और आईटी (IT) इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई। टेक्नोलॉजी स्टॉक्स, जो अब तक मजबूत दिख रहे थे, वे भी ग्लोबल सेक्टर रोटेशन के शिकार हो गए। इंडिया VIX (Volatility Index), जो फिलहाल 15.8 के आसपास है, बाजार में लगातार अस्थिरता के संकेत दे रहा है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की ओर से मिलने वाला सपोर्ट भी इस बार बड़े ग्लोबल मैक्रो शॉक के सामने कम प्रभावी साबित हो रहा है। ऐसे में, बाजार के लिए 23,000–23,100 का सपोर्ट लेवल खतरे में दिख रहा है। निवेशकों को अब बढ़ती इनपुट लागतों (Input Costs) और ऊंची ब्याज दरों वाले माहौल में कॉर्पोरेट मार्जिन को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
