भारतीय बाज़ारों में तूफानी तेज़ी: EU और US संग ट्रेड डील की ख़बरों से Sensex-Nifty की लंबी छलांग!

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारतीय बाज़ारों में तूफानी तेज़ी: EU और US संग ट्रेड डील की ख़बरों से Sensex-Nifty की लंबी छलांग!
Overview

भारतीय शेयर बाज़ारों में पिछले दो हफ़्तों में ज़बरदस्त उछाल आया है। BSE Sensex और Nifty 50, दोनों में **5%** से ज़्यादा का इज़ाफ़ा देखा गया है। इस तेजी का मुख्य कारण यूरोपियन यूनियन (EU) और अमेरिका (US) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर हुई प्रोग्रेस है। बजट के दिन सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोत्तरी के चलते आई मामूली गिरावट के बावजूद, बाज़ार हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।

ट्रेड डील की उम्मीदों ने बाज़ार को दी रफ़्तार

भारतीय शेयर बाज़ारों ने ज़बरदस्त रेसिलिएंस (resilience) दिखाई है। BSE Sensex और Nifty 50, अपने फरवरी 1 के निचले स्तरों से 5% से ज़्यादा का उछाल दर्ज कर चुके हैं। बजट की घोषणाओं के बाद फ्यूचर्स और ऑप्शन्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोत्तरी के चलते शुरुआती गिरावट आई थी। लेकिन, यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और अमेरिका (US) के साथ व्यापारिक बातचीत में हुई प्रोग्रेस ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इन ट्रेड डील्स की सकारात्मक ख़बरों ने बाज़ार को नई ऊंचाई दी है।

एनालिस्ट्स की राय: बाज़ार में क्या है वैल्यू और कहां करें निवेश?

वर्तमान वैल्यूएशंस (valuations) पर, बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इन ट्रेड डेवलपमेंट से जुड़ी ज़्यादातर अच्छी ख़बरें शेयरों की कीमतों में पहले ही शामिल हो चुकी हैं। Equinomics Research के फाउंडर और हेड ऑफ़ रिसर्च, G Chokkalingam का कहना है कि EU और US के बाज़ार भारत के एक्सपोर्ट (export) के लिए बहुत अहम हैं। उन्हें उम्मीद है कि इससे रुपये में स्थिरता आएगी और विदेशी निवेशकों की वापसी हो सकती है। वह शॉर्ट से मीडियम टर्म के लिए स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में खरीदारी (accumulation) की सलाह दे रहे हैं।

दूसरी ओर, Alphaniti Fintech के को-फाउंडर और डायरेक्टर, UR Bhat ज़्यादा सतर्क (cautious) रुख अपना रहे हैं। वह मानते हैं कि ट्रेड डील्स ने इम्पोर्ट (import) को लेकर बाज़ार की अनिश्चितता कम की है। लेकिन, भारत-US ट्रेड डील की बारीकियों (fine print) को समझने के बाद ही बाज़ार की असली प्रतिक्रिया सामने आएगी। Bhat का कहना है, "बाज़ार ट्रेड डील की फाइन प्रिंट पर रिएक्ट करेंगे।" वह निवेशकों को फिलहाल निवेशित बने रहने की सलाह देते हैं और केवल 2-3% की गिरावट पर लार्ज-कैप शेयरों में निवेश पर विचार करने को कहते हैं।

सेक्टरवार प्रदर्शन और टेक्निकल चार्ट्स क्या कहते हैं?

सेक्टरों की बात करें तो, Nifty Energy, Realty और Consumer Durables इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें करीब 7-10% का उछाल दर्ज किया गया है। इसके विपरीत, Nifty IT सेक्टर पिछड़ गया है और इसमें लगभग 7% की गिरावट आई है।

टेक्निकल चार्ट्स के अनुसार, Nifty फिलहाल 25,800 के महत्वपूर्ण लेवल को टेस्ट कर रहा है। HDFC Securities के सीनियर डेरिवेटिव और टेक्निकल एनालिस्ट Nandish Shah के मुताबिक, इस लेवल से ऊपर क्लोजिंग होने पर यह 26,100 तक जा सकता है। सपोर्ट 25,500-25,550 के स्तर पर नज़र आ रहा है।

Enrich Money के CEO, Ponmudi R का कहना है कि Nifty अपने मेजर मूविंग एवरेज (moving averages) के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो एक पॉजिटिव सेटअप दिखा रहा है। 25,700 से ऊपर बने रहना इस पॉजिटिव स्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है। अगर यह 25,650 से नीचे गिरता है, तो प्रॉफिट-बुकिंग (profit-booking) या कंसोलिडेशन (consolidation) हो सकता है। मुख्य सपोर्ट 25,500–25,600 ज़ोन में है, जो 50- और 100-दिन के EMA (Exponential Moving Average) के करीब है।

26,000 का स्तर एक बड़ा साइकोलॉजिकल रेजिस्टेंस (psychological resistance) है। अगर बाज़ार इस स्तर को पार कर लेता है, तो यह नए ऑल-टाइम हाई (all-time highs) की ओर बढ़ सकता है। मोमेंटम इंडिकेटर्स (momentum indicators), जैसे RSI और MACD, ऊपर की ओर बढ़त दिखा रहे हैं, जो बाज़ार में स्ट्रेंथ का संकेत दे रहे हैं।

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