बाज़ार पर महंगा तेल और FII बिकवाली का असर
जून महीने की शुरुआत में घरेलू शेयर बाज़ार पर लगातार दबाव बना हुआ है. इसकी मुख्य वजह है कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतों का $93 प्रति बैरल के करीब पहुंचना. तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है.
शुक्रवार को निफ्टी 50 में 1.5% की बड़ी गिरावट देखी गई थी, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है. GIFT Nifty से कुछ स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन अमेरिकी बाज़ार से कोई खास पॉजिटिव संकेत न मिलने से घरेलू बाज़ार में तेज़ी की उम्मीद कम है.
विदेशी निवेशकों का डर या रणनीति?
हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली देखने को मिली है. 29 मई को FIIs ने बाज़ार से ₹21,105.86 करोड़ निकालकर पोर्टफोलियो से पैसे निकाले हैं. यह बिकवाली इतनी ज़्यादा है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की खरीद भी इसे संभाल नहीं पा रही है.
जानकारों का मानना है कि विदेशी निवेशक इमर्जिंग मार्केट से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर जा रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को भी इस बिकवाली का एक बड़ा कारण माना जा रहा है.
फर्टीलाइज़र सेक्टर पर पैनी नज़र
इस गिरावट के पीछे सेक्टर-स्पेसिफिक कारणों पर भी ध्यान देना ज़रूरी है. जहां इलेक्ट्रॉनिक्स और पैकेजिंग जैसे सेक्टरों ने कुछ मजबूती दिखाई है, वहीं फर्टीलाइज़र सेक्टर में 3.66% की गिरावट आई है. यह गिरावट इस बात का संकेत है कि तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर कंपनियों की लागत और मार्जिन पर पड़ रहा है.
जिन कंपनियों का लागत ढांचा (input cost) तेल की कीमतों से जुड़ा है, वे दोहरी मार झेल रही हैं - एक तरफ मार्जिन घट रहा है, वहीं दूसरी तरफ मांग भी कमजोर पड़ सकती है. इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स (DXY) का मजबूत होना और रुपये का अप्रत्याशित रूप से बढ़ना भी चिंता का विषय है. अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाली तिमाहियों में विश्लेषकों द्वारा कंपनियों के मुनाफे के अनुमानों में और कटौती देखी जा सकती है.
आगे क्या?
फिलहाल, बाज़ार की नज़र घरेलू सपोर्ट लेवल्स पर टिकी रहेगी. भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए, आक्रामक ग्रोथ की बजाय डिफेंसिव पोजीशन लेना बेहतर समझा जा रहा है. जब तक डॉलर इंडेक्स स्थिर नहीं होता या तेल के दाम कम नहीं होते, तब तक निफ्टी 50 के लिए ऊपरी स्तरों पर एक कैप बना रह सकता है, जब तक कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुक न जाए.
