अमेरिकी बाजारों में गिरावट और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, भारतीय शेयर बाजार आज एक सकारात्मक शुरुआत के लिए तैयार हैं। हालांकि, स्टेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताओं के कारण तेल की कीमतों में उछाल आया है, लेकिन घरेलू संस्थागत समर्थन बाजार को स्थिर रखने की उम्मीद है।
क्या हुआ?
आज भारतीय बेंचमार्क सूचकांक, बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50), मजबूती के साथ खुलने वाले हैं। यह सकारात्मक शुरुआत गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) से मिले सकारात्मक संकेतों से समर्थित है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निफ्टी 50 की चाल को ट्रैक करता है। यह अपेक्षित रुझान वैश्विक बाजारों के लिए एक कठिन दिन के बावजूद आया है, जहां प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में काफी गिरावट देखी गई, और लगातार भू-राजनीतिक तनावों ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा की है।
वैश्विक तनाव क्यों मायने रखता है?
इस समय वैश्विक बाजारों को प्रभावित करने वाली मुख्य चिंता संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का बढ़ना है। अमेरिका द्वारा नए सैन्य हमलों के बाद, ईरान ने स्टेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद करने की घोषणा की है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है, और यहां किसी भी तरह की बाधा का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है। भारत के लिए, यह एक महत्वपूर्ण विकास है क्योंकि देश अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है। तेल की कीमतों में तेज वृद्धि से आयात लागत बढ़ सकती है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती है और ईंधन या पेट्रोलियम-आधारित कच्चे माल पर निर्भर कंपनियों के मुनाफे को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।
अमेरिकी बाजार का संदर्भ
निवेशक अंतरराष्ट्रीय रुझानों, विशेष रूप से अमेरिकी बाजारों पर करीब से नजर रख रहे हैं। रात भर में, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average), एसएंडपी 500 (S&P 500), और नैस्डैक (Nasdaq) जैसे सूचकांकों में 1.5% से अधिक की गिरावट के साथ बिकवाली देखी गई। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) में अप्रत्याशित रूप से कम अमेरिकी मुद्रास्फीति (inflation) के आंकड़े जारी होने के बाद भी मजबूती आई। यह दर्शाता है कि निवेशक वर्तमान में भू-राजनीतिक अस्थिरता के सामने जोखिम भरी संपत्तियों जैसे शेयरों के बजाय डॉलर की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
घरेलू संस्थागत समर्थन
भारतीय बाजार निवेशकों के दो प्रमुख समूहों के बीच खींचतान का गवाह बन रहा है। 10 जून के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹2,124 करोड़ की इक्विटी की बिकवाली करते हुए शुद्ध बिकवाली की। हालांकि, बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) से एक सहारा मिला है, जिन्होंने ₹3,123 करोड़ की खरीद के साथ शुद्ध खरीदार के रूप में प्रवेश किया। विदेशी बिकवाली की अवधि के दौरान बाजार में बड़ी गिरावट को रोकने में यह लगातार घरेलू खरीदारी एक महत्वपूर्ण शक्ति रही है।
निवेशक आगे क्या ट्रैक करें?
वर्तमान माहौल को देखते हुए, ट्रेडिंग सत्र के दौरान अस्थिरता (volatility) बनी रह सकती है। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखना चाह सकते हैं, क्योंकि किसी भी स्थायी उछाल से बाजार की भावना कमजोर हो सकती है। इसके अतिरिक्त, FII और DII की भागीदारी की दैनिक प्रवृत्ति देखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह संतुलन अक्सर बाजार की बढ़त बनाए रखने की क्षमता निर्धारित करता है। अंत में, स्टेट ऑफ होर्मुज या अमेरिका-ईरान संबंधों के संबंध में कोई भी आगे का घटनाक्रम वैश्विक और घरेलू बाजार की स्थिरता के लिए सबसे महत्वपूर्ण निगरानी योग्य होगा।
