निवेशक क्यों हुए शेयर बाजार से दूर?
महामारी के बाद रिटेल निवेशकों की भीड़ जिस तरह शेयर बाजार में उमड़ी थी, उसमें अब कमी आई है। निवेशक ऊंची वैल्यूएशन (Valuations) और ग्लोबल अनिश्चितताओं से घबराए हुए हैं। साथ ही, डेरिवेटिव्स (Derivatives) मार्केट में सेबी (SEBI) के कड़े नियमों ने सट्टेबाजी को कम कर दिया है। कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना, साप्ताहिक एक्सपायरी सीमित करना और बैंकों द्वारा प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए फंडिंग पर रोक जैसे कदमों से ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी कमी आई है।
विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी
वित्त वर्ष 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड ₹1.6-1.8 लाख करोड़ निकाले। इससे FIIs की हिस्सेदारी 13 साल के निचले स्तर पर आ गई। खासकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ट्रेड वॉर जैसी वैश्विक चिंताओं के चलते कंपनियों के मुनाफे को लेकर उम्मीदें कम हुई हैं। अमेरिका में AI पर फोकस बढ़ने से भारत जैसे उभरते बाजारों से फंड दूसरी ओर चला गया।
घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा
वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने रिटेल निवेशकों के एसआईपी (SIP) से आने वाले लगातार पैसे के दम पर बाजार को सहारा दिया। DIIs ने FY26 में रिकॉर्ड ₹8.5 लाख करोड़ का निवेश किया, जिससे उनकी हिस्सेदारी ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई।
एएमसी कंपनियों पर दबाव
रिटेल निवेशकों के एसआईपी (SIP) में 20.7% की जोरदार वृद्धि होकर यह ₹3.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया, लेकिन एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) जैसे HDFC AMC और ICICI Prudential AMC के मुनाफे पर दबाव देखा गया। HDFC AMC का नेट प्रॉफिट Q4 FY26 में 2.5% घटकर ₹622.66 करोड़ रहा, हालांकि रेवेन्यू 16% बढ़कर ₹1,051.51 करोड़ हो गया। ICICI Prudential AMC का मुनाफा पिछले तिमाही की तुलना में 16.8% गिरकर ₹763 करोड़ रहा। दोनों कंपनियों ने डिविडेंड (Dividend) की घोषणा की, लेकिन तिमाही-दर-तिमाही मुनाफे में गिरावट दिखी।
ऊंची वैल्यूएशन और ग्लोबल जोखिम
FY26 के अंत में भारतीय शेयर बाजार MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स के मुकाबले पिछड़ गया। MSCI इंडिया इंडेक्स 21.31x के फॉरवर्ड P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स के 13.44x से काफी ज्यादा है। बाजार में करेक्शन के बावजूद भारत का वैल्यूएशन प्रीमियम बना हुआ है। इसके अलावा, ग्लोबल अनिश्चितताएं और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम एफआईआई (FII) की निकासी को और बढ़ा सकता है।
आगे क्या?
कुल मिलाकर, डेरिवेटिव्स से दूरी, रिटेल भागीदारी में कमी और ऊंची वैल्यूएशन जैसी वजहें एएमसी कंपनियों के लिए चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। एसआईपी (SIP) से आ रहा फ्लो कुछ सहारा दे रहा है, लेकिन बाजार की दिशा ग्लोबल जोखिमों के कम होने, वैल्यूएशन के तर्कसंगत होने और AI जैसी नई ग्रोथ स्टोरीज के विकसित होने पर निर्भर करेगी।
