US से लौटे भारतीय IT प्रोफेशनल्स की सैलरी में बड़ी कटौती, Jobs की कमी!

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AuthorNeha Patil|Published at:
US से लौटे भारतीय IT प्रोफेशनल्स की सैलरी में बड़ी कटौती, Jobs की कमी!

अमेरिका में छंटनी के बाद भारत लौटे IT प्रोफेशनल्स को डोमेस्टिक जॉब मार्केट में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनियां अब इंटरनेशनल एक्सपीरियंस से ज्यादा खास स्किल्स पर ध्यान दे रही हैं, जिसके चलते सैलरी की उम्मीदें भी कम हो गई हैं। पिछले **28 महीनों** में IT Hiring सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

क्यों घट रही है Jobs?

अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों से छंटनी के बाद भारत लौटे IT प्रोफेशनल्स के लिए घरेलू बाजार में मौके कम हो गए हैं। देश में IT Hiring पिछले 28 महीनों के अपने सबसे निचले स्तर पर है। ऐसे में, टैलेंट की सप्लाई ज्यादा होने और सीनियर लेवल की Jobs कम होने से एक बड़ा गैप पैदा हो गया है।

कंपनियों की बदलती प्राथमिकताएं

अब कंपनियां सिर्फ इंटरनेशनल ब्रांड के नाम पर हायरिंग नहीं कर रही हैं। उनका फोकस उन कैंडिडेट्स पर है जो बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन और AI को अपनाने में सीधे तौर पर मदद कर सकें। इसी वजह से, अमेरिका जैसे महंगे बाजारों में काम करने वाले कई प्रोफेशनल्स को अब भारत में वैसी सैलरी नहीं मिल पा रही है, जितनी वे उम्मीद कर रहे थे।

AI इस बदलाव का एक बड़ा कारण बन रहा है। AI टूल्स रूटीन कामों को ऑटोमेट कर रहे हैं, जिससे कुछ पारंपरिक IT Roles की जरूरत कम हो रही है। हालांकि, इससे क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा इंजीनियरिंग और एंटरप्राइज AI आर्किटेक्चर जैसे खास क्षेत्रों के विशेषज्ञों की डिमांड बढ़ रही है। अब सामान्य अनुभव के बजाय सीधे तौर पर बिजनेस पर असर डालने वाले प्रोफेशनल्स को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।

GCCs का बढ़ता महत्व

लौट रहे प्रोफेशनल्स के लिए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) यानी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ऑफशोर आर्म्स एक बड़ा एम्प्लॉयमेंट हब बनकर उभरे हैं। ये सेंटर बेंगलुरु, हैदराबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों में केंद्रित हैं। अनुमान है कि इस साल GCCs 4 लाख से ज्यादा नई Jobs पैदा कर सकते हैं। लेकिन यहां भी डोमेस्टिक टैलेंट के साथ कॉम्पिटिशन बहुत तगड़ा है।

निवेशकों के लिए यह ट्रेंड IT सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत है। कंपनियां बढ़ती लागत और AI इंटीग्रेशन के दबाव से निपटने के लिए हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की ओर बढ़ रही हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां इन प्रोफेशनल्स को कैसे एब्जॉर्ब करती हैं और क्या इससे उनकी प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ता है। सबसे अहम यह है कि क्या ये प्रोफेशनल्स डोमेस्टिक GCCs और प्रोडक्ट-बेस्ड स्टार्टअप्स की खास जरूरतों को पूरा कर पाते हैं और क्या यह टैलेंट इनफ्लक्स कंपनियों को AI और इनोवेशन डिवीजन्स को सस्ते में बढ़ाने का मौका देता है।

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