सेविंग्स का बदलता परिदृश्य
आंकड़े बताते हैं कि भारतीय घरों की फाइनेंसियल सेविंग्स में फिक्स्ड डिपॉजिट्स का हिस्सा लगातार गिर रहा है। इकोनॉमिक सर्वे और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के डेटा के अनुसार, फाइनेंसियल ईयर 2012 में जहां कुल फाइनेंसियल सेविंग्स में डिपॉजिट्स का हिस्सा 57.9% था, वहीं इसके FY25 तक घटकर 35.2% रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा FY22 में 31.95% के निचले स्तर पर भी पहुंच गया था। यह साफ दिखाता है कि अब लोग ज़्यादा रिस्क लेने से कतरा नहीं रहे हैं।
शेयरों में निवेश का बढ़ा क्रेज
इसी के साथ, सीधे और अप्रत्यक्ष तौर पर शेयरों (shares) में निवेश का चलन काफी बढ़ा है। सितंबर 2025 तक व्यक्तिगत तौर पर सीधे शेयरों में निवेश बढ़कर करीब 9.6% तक पहुंच सकता है, जो FY14 में 8% से भी कम था। वहीं, म्यूचुअल फंड्स के ज़रिए अप्रत्यक्ष निवेश का हिस्सा लगभग तीन गुना बढ़कर 9.2% हो गया है। अगर कुल रकम की बात करें, तो FY14 में सिर्फ ₹8 लाख करोड़ के मुकाबले, सितंबर 2025 तक व्यक्तिगत शेयर होल्डिंग्स का अनुमान ₹84 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। मार्च 2025 तक, कुल घरेलू फाइनेंसियल एसेट्स में शेयरों और इन्वेस्टमेंट फंड्स का हिस्सा बढ़कर 23% हो गया है, जो छह साल पहले मात्र 15.7% था।
डेट मार्केट में सीमित भागीदारी
शेयर बाज़ार में इतनी तेजी के बावजूद, रिटेल निवेशकों की कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और डेट-ओरिएंटेड प्रोडक्ट्स में भागीदारी अब भी सीमित है। भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट का आकार जीडीपी का केवल 16-17% है, जबकि शेयर बाज़ार की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन जीडीपी के 130% से ज़्यादा है। विकसित देशों की बात करें तो अमेरिका में यह आंकड़ा 40% और चीन में 36% के करीब है।
आगे का रास्ता
सेविंग्स की यह नई स्ट्रैटेजी पोर्टफोलियो को सिर्फ़ अलग-अलग जगह बांटने का काम कर रही है, न कि पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट्स को पूरी तरह से बदलने का। इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, निवेशकों का यह बढ़ता भरोसा अगर डेट मार्केट तक पहुंचता है, तो यह वाकई मज़बूत पोर्टफोलियो बनाने और एक परिपक्व फाइनेंसियल सिस्टम के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम होगा।
